कहने को तो MP सरकार शिक्षा सुधार और पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया का नारा जोर-शोर से चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सीधी जिले के कुसमी ब्लॉक के सेमरिया टोला प्राथमिक स्कूल में शिक्षक और कर्मचारियों की मनमानी खुलेआम देखने को मिली है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्कूल में न तो बच्चों को ठीक से पढ़ाया जाता है और न ही मध्यान्ह भोजन मिलता है। यहां तक कि कई महीनों से बच्चों को मिड-डे मील का एक निवाला भी नहीं मिला।
शिकायत मिलने पर जब एक स्थानीय मीडिया कर्मी मौके पर पहुंचा, तो नज़ारा चौंकाने वाला था। कक्षा में बच्चों के बजाय एक वृद्ध महिला और एक शिक्षिका बैठी थीं। वह शिक्षिका स्कूल के समय में आराम से मोबाइल चला रही थी और बच्चों की पढ़ाई से कोई मतलब नहीं था।
आगबबूला हुई शिक्षिका
कमरे में रसोई ठंडी पड़ी थी, जिससे साफ था कि मध्यान्ह भोजन उस दिन भी नहीं बना। मीडिया कर्मी ने जब स्थिति का वीडियो बनाना शुरू किया, तो महिला शिक्षिका आगबबूला हो गई।
उन्होंने मीडिया कर्मी से बहस करते हुए कक्ष का दरवाज़ा बंद कर दिया और उल्टे उसी पर आरोप लगाने लगीं कि उसने अभद्रता की है। बताया गया कि जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो शिक्षिका ने पुलिस थाने पहुंचकर पत्रकार पर झूठे आरोप लगाए और वीडियो डिलीट करने के लिए दबाव बनाने लगीं।
वायरल शिक्षिका का वीडियो
घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है, जिसमें शिक्षिका का पूरा बर्ताव और स्कूल की हालत साफ दिख रही है। लोगों में आक्रोश है कि जिन बच्चों के भविष्य को संवारने का जिम्मा इन्हीं के कंधों पर है, वहीं खुद लापरवाही और दबंगई में डूबी हुई हैं। ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत कर महिला शिक्षिका पर कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, पत्रकार संघों ने भी इस मामले में मीडिया कर्मी को धमकाने की निंदा की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में कब और कैसी कार्रवाई करता है।
