बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड के सुघराईन पंचायत के लोगों ने इस बार वोट डालने से साफ इनकार कर दिया। गांव वालों ने एक ही नारा लगाया “सड़क नहीं तो वोट नहीं।” सुबह से ही गांव के चार बूथों 284, 285, 286 और 287 पर सन्नाटा पसरा रहा। मतदान दल बैठे रहे लेकिन मतदाता नहीं पहुंचे। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, “सरकार हर बार विकास की बातें करती है, लेकिन हमारे गांव का हाल देख लीजिए। क्या नाव से नदी पार करना ही विकास है?”
ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के इतने सालों बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंची है। बरसात हो या गर्मी, गांव से बाहर जाने के लिए उन्हें नदी पार करनी पड़ती है और उसके लिए एकमात्र साधन नाव है। लोगों का कहना है कि अगर किसी की तबीयत बिगड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाना पड़े, तो नाव न मिलने की वजह से कई बार जान जाने की नौबत आ जाती है।
डूबने का रहता है डर
78 साल की जाजा देवी ने अपनी तकलीफ बयां करते हुए कहा कि बचपन से लेकर अब तक सिर्फ नाव ही देखी है। मेरे बेटे-बहू और पोते-पोतियां भी नाव से ही आते-जाते हैं। जब भी नाव में बैठते हैं, डर लगता है कि कहीं पलट न जाए। गांव के रामसखी देवी, सतीश राय, गणेश राय और राहुल राय ने भी एक स्वर में कहा कि अगर इस बार सड़क नहीं बनी, तो वे लोकसभा चुनाव में भी वोट नहीं डालेंगे।
अफसर पहुंचे समझाने
मतदान बहिष्कार की खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। सीओ गोपाल पासवान, बीडीओ प्रभा शंकर मिश्रा और जीविका की अन्नू कुमारी खुद घाट पर पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की। अफसरों ने कहा कि सरकार को मांग बताई जाएगी, लेकिन ग्रामीण अड़े रहे, “पहले सड़क, फिर वोट।”
मतदान केंद्र पर पसरा रहा सन्नाटा
सुबह सात बजे से ही पीठासीन पदाधिकारी और पूरी पोलिंग टीम बूथ पर मौजूद रही। उम्मीद थी कि कुछ देर में लोग आ जाएंगे, मगर दोपहर 12 बजे तक भी एक भी वोट नहीं पड़ा। अधिकारी खाली बूथों को देखकर लौट गए, लेकिन ग्रामीण अपने फैसले पर कायम रहे। ग्रामीणों का कहना है, “अब बहुत वादे सुन लिए। जब तक सड़क नहीं बनेगी, कोई वोट नहीं डालेगा।”
