बिहार चुनाव का नतीजा साफ हो चुका है और इस बार तस्वीर बिल्कुल एकतरफा दिख रही है। 243 सीटों वाली विधानसभा में NDA ने 200 से ऊपर की बढ़त बना ली है, जो बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय जैसा माहौल तैयार कर रही है। महागठबंधन दूसरी तरफ बुरी तरह पिछड़ गया है और 40 सीटों के आसपास लड़खड़ाता दिख रहा है। जैसे ही बढ़त के आंकड़े साफ होने लगे, प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, “ये सुशासन और स्थिरता में जनता के विश्वास की जीत है”। दरअसल, 2020 के मुकाबले NDA को लगभग 70 सीटों का भारी फायदा हुआ है, इतने ही आंकड़े महागठबंधन के पाले से उड़ गए।
सुबह नतीजे साफ होते ही सम्राट चौधरी और ललन सिंह नीतीश कुमार से मिलने पहुंच गए। यह मुलाकात स्पष्ट संकेत देती है कि अगली सरकार की कमान अब बहुत मजबूती से NDA के हाथों में रहेगी, और नीतीश की भूमिका एक बार फिर केंद्र में है।
JDU की धमाकेदार वापसी
जो JDU पिछले चुनाव में 43 सीटों पर सिमट गई थी, उसने इस बार 80 से ज्यादा सीटों के साथ जोरदार वापसी की है। इससे नीतीश कुमार की राजनीति पर उठे सारे सवाल फिलहाल शांत हो गए। दूसरी तरफ BJP 90 सीटों के आसपास पहुंचते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
तेजस्वी पास, तेजप्रताप फेल
चुनाव के बड़े चेहरों में राघोपुर सीट से तेजस्वी यादव 12 हजार वोटों से जीत गए हैं। यानी उनका जनाधार अभी भी कायम है। लेकिन दूसरी तरफ तेजप्रताप यादव महुआ से हार गए। हार के बाद उनकी पार्टी JJD ने एक अजीबोगरीब पोस्ट डालकर माहौल और गरमा दिया। पोस्ट में लिखा गया, “तेजस्वी फेलस्वी हो गया”, “RJD को जयचंदों ने खोखला किया”, “मोदी विश्व के मजबूत नेता हैं”, “NDA को उसकी एकता ने जिताया”। यानि हार का दर्द सोशल मीडिया पर भी खुलकर छलक गया।
महागठबंधन की हालत खराब
RJD सिर्फ 26 सीटों के आसपास सिमट रही है। कांग्रेस की हालत और खराब सिर्फ 6 सीटें। PK की जन सुराज और मुकेश सहनी की VIP दोनों का खाता तक नहीं खुला। अन्य और निर्दलीय सिर्फ 3 सीटें पकड़कर खड़े हैं। बिहार का जनमत इस बार साफ-साफ बोल रहा है। स्थिरता, चेहरे और एकता पर जनता ने भरोसा किया है। नतीजे बताते हैं कि राजनीति का हवा-पानी इस बार पूरी तरह बदल चुका है और आने वाले पांच साल बिहार में एक बिल्कुल अलग राजनीतिक माहौल देखने को मिलेगा।
