MP हाईकोर्ट ने उत्तरप्रदेश में रहने वाली एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए शहडोल की भूमि बेचने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि आज देशभर में अपनी ही जमीन को भू-माफियाओं से सुरक्षित रखना आम लोगों के लिए बड़ी मुश्किल बन गया है। बढ़ती जमीन कीमतों के कारण विवाद और दबंगई भी तेजी से बढ़ रही है।
यूपी के गाजी नगर निवासी ज्योतिराज बालादास ने कोर्ट को बताया कि उनके पति रेलवे में लोको पायलट थे और वर्ष 2022 में उनका निधन हो गया। जीवनकाल में उन्होंने शहडोल जिले के ग्राम सोखी में एक जमीन खरीदी थी। पति की मृत्यु के बाद महिला अपनी नाबालिग बेटी के साथ यूपी में रह रही है, ऐसे में सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित जमीन की सुरक्षा और देखभाल करना उनके लिए संभव नहीं रहा। इसी कारण उन्होंने हाईकोर्ट से जमीन बेचने की अनुमति मांगी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि वर्तमान समय में देश के लगभग सभी हिस्सों में भू-माफिया सक्रिय हैं। जमीनों की बढ़ती कीमतों ने अवैध कब्जों और धोखाधड़ी के मामलों को बढ़ा दिया है। कोर्ट ने माना कि अपीलकर्ता इतनी दूर रहकर भूमि की सुरक्षा नहीं कर सकतीं, इसलिए उनका भूमि बेचने का अनुरोध व्यावहारिक और तर्कसंगत है।
अनुमति के साथ लगाई शर्तें
मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने जमीन बिक्री की अनुमति तो दे दी, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ। अदालत ने निर्देश दिया कि जमीन बेचने के बाद प्राप्त कुल राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा महिला को अपनी नाबालिग बेटी के नाम राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा करना होगा। यह राशि बेटी के वयस्क होने पर ही निकाली जा सकेगी। शेष धनराशि का उपयोग महिला अपनी आवश्यकताओं और जीवन-यापन के लिए कर सकती है।
याचिकाकर्ता की ओर से रखा गया पक्ष
ज्योतिराज बालादास की ओर से एडवोकेट योगेश सिंह बघेल और प्रवीण मिश्रा ने हाईकोर्ट में दलीलें पेश कीं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जमीन की दूरी, सुरक्षा संबंधी खतरे और आर्थिक बोझ के कारण महिला को असामान्य परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखते हुए याचिका को स्वीकार किया और तय शर्तों के साथ भूमि विक्रय की अनुमति प्रदान की।
