इंदौर विधानसभा-3 से भाजपा विधायक गोलू शुक्ला का परिवार एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला शहर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़ा है, जहां प्रतिबंध के बावजूद विधायक के छोटे बेटे और बहू गर्भगृह में प्रवेश करते नजर आए। भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने एक-दूसरे को माला पहनाने का वीडियो सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, विधायक शुक्ला के बड़े बेटे अंजनेश और सिमरन का विवाह 11 दिसंबर को हुआ था। अगले ही दिन 12 दिसंबर को नवविवाहित जोड़ा खजराना गणेश मंदिर पहुंचा। दर्शन के दौरान दोनों गर्भगृह के भीतर गए और वहां धार्मिक रस्म निभाई। यह सब ऐसे समय हुआ, जब मंदिर प्रशासन ने आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगा रखी है।
कोरोना काल से लागू है प्रतिबंध
खजराना गणेश मंदिर में कोरोना काल के दौरान गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगाई गई थी, जो अब तक जारी है। नियमों के अनुसार केवल विशेष अनुमति पर ही अंदर जाने की इजाजत दी जाती है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर विधायक के परिवार को यह छूट दी गई और मंदिर प्रबंधन ने नियमों का पालन क्यों नहीं कराया। यह पहला मौका नहीं है जब विधायक गोलू शुक्ला के छोटे बेटे रुद्राक्ष शुक्ला का नाम धार्मिक स्थलों पर विवादों से जुड़ा हो। जुलाई 2025 में उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी रुद्राक्ष जबरन गर्भगृह में प्रवेश कर गए थे। उस दौरान मंदिर कर्मचारी द्वारा रोके जाने पर कहासुनी और धमकी देने के आरोप लगे थे। विधायक स्वयं भी उस समय मौके पर मौजूद थे।
महाकाल मंदिर प्रकरण की सफाई
महाकाल मंदिर विवाद बढ़ने पर मंदिर प्रशासन ने कहा था कि अनुमति केवल विधायक गोलू शुक्ला को दी गई थी, उनके साथ अन्य लोगों को नहीं। वहीं विधायक शुक्ला ने दावा किया था कि दर्शन के लिए वैध अनुमति थी और किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया। इसके बावजूद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंचा और भाजपा संगठन ने विधायक को भोपाल बुलाकर फटकार भी लगाई थी।
इससे पहले अप्रैल में देवास की माता टेकरी पर भी रुद्राक्ष शुक्ला विवादों में आए थे। आधी रात को मंदिर खुलवाने को लेकर पुजारी से बहस हुई थी। आरोप लगे कि पुजारी को धमकाया गया और मारपीट की गई। बाद में रुद्राक्ष द्वारा माफी मांगे जाने के बाद मामला शांत हुआ था।
मंदिर प्रशासन पर उठे सवाल
खजराना मंदिर की ताजा घटना के बाद अब सवाल सिर्फ विधायक परिवार पर नहीं, बल्कि मंदिर प्रशासन पर भी उठ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि जब आम लोगों के लिए नियम सख्त हैं, तो प्रभावशाली लोगों को विशेष छूट क्यों दी जा रही है। इस पूरे मामले ने धार्मिक स्थलों पर समान नियमों के पालन की बहस को फिर से तेज कर दिया है।
