MP के खरगोन शहर के बिस्टान नाका चौराहे पर आदिवासी जननायक टंट्या मामा की मूर्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कागजों में मूर्ति को धातु या पत्थर से बनाने का आदेश था, लेकिन असल में वहां सस्ते फाइबर की मूर्ति लगा दी गई। मूर्ति निर्माण के लिए 9 लाख 90 हजार रुपए का टेंडर जारी किया गया था। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश थे कि मूर्ति केवल पक्के पत्थर या धातु की हो। लेकिन लोकार्पण के बाद जांच में पता चला कि मूर्ति न तो पत्थर की है और न ही धातु की, बल्कि केवल 50 हजार रुपए मूल्य की फाइबर की मूर्ति लगाई गई।
घटना उजागर होने के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही ठेका कंपनी पिनाक ट्रेडिंग कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया गया। अब उस स्थान पर वास्तव में धातु या पत्थर की मूर्ति लगाई जाएगी।
खरगोन में भ्रष्टाचार पर सवाल
यह मामला शहर में सार्वजनिक परियोजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार की एक और मिसाल बन गया है। मूर्तियों और पार्कों के नाम पर बजट के बड़े हिस्से का गलत उपयोग सतना और खरगोन जैसे शहरों में पहले भी सामने आ चुका है। विशेषज्ञ और नागरिक प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर सख्त रोक लगाई जाए।
जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जाने वाली मूर्तियाँ सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसे मामलों से जनता का विश्वास सार्वजनिक प्रशासन पर घटता है और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। अब प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में किसी भी परियोजना में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। मूर्ति अब उचित धातु या पत्थर की सामग्री से बनाई जाएगी।
