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19 साल बाद महाशिवरात्रि पर बनेगा दुर्लभ ग्रह संयोग, महाकाल मंदिर में तैयारियां तेज

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Published On: 3 February 2026

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी के संधिकाल में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी रविवार को मनाई जाएगी। इस खास दिन ग्रहों की स्थिति बेहद विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य, बुध, शुक्र और राहु कुंभ राशि में, केतु सिंह राशि में तथा चंद्रमा मकर राशि में गोचर करेगा। ग्रहों की यह स्थिति धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जा रही है।

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर त्रिकोण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसे अत्यंत मंगलकारी योग माना जाता है। ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बावाला के मुताबिक ऐसा ग्रह संयोग पहले वर्ष 2007 में बना था। करीब 19 साल बाद फिर से वही ग्रह स्थिति बनने से इस महाशिवरात्रि का महत्व और अधिक बढ़ गया है। मान्यता है कि इस विशेष योग में भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की संभावना अधिक रहती है।

महाकाल मंदिर में तैयारियां तेज

देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि को लेकर तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं। 6 फरवरी से मंदिर परिसर में विशेष स्वच्छता और सौंदर्यीकरण कार्य चल रहा है। मंदिर के मुख्य शिखर की धुलाई, रंग-रोगन, कोटितीर्थ कुंड की सफाई और आसपास के क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। मंदिर परिसर में स्थित करीब 40 छोटे-बड़े मंदिरों की पुताई का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

दर्शन व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारी

महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने मंदिर प्रशासन और समिति सदस्यों के साथ बैठक कर दर्शन व्यवस्था को अंतिम रूप देने की तैयारी शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं को सुगम और व्यवस्थित दर्शन मिले, इसके लिए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व

शिव महापुराण के अनुसार महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। यह पूजा प्रदोष काल से शुरू होकर निशिथ काल यानी मध्य रात्रि और ब्रह्म मुहूर्त तक चलती है। इस दौरान भक्त अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सफलता लेकर आती है।

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