MP में उच्च शिक्षा से जुड़े लाखों छात्रों के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के छात्र शिकायत निवारण विनियम 2023 को अब प्रदेश में सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नियुक्त लोकपाल की भूमिका अब केवल औपचारिक नहीं रहेगी। संस्थानों को लोकपाल के आदेशों का पालन करना अनिवार्य होगा। यह नियम सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों सहित निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों पर लागू रहेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी छात्र की शिकायत जांच में गलत या बेबुनियाद पाई जाती है, तो लोकपाल संबंधित छात्र के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे छात्र शिकायत निवारण प्रणाली को प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू करें, ताकि छात्रों को समय पर न्याय मिल सके।
MP में उच्च शिक्षा संस्थानों पर सख्ती
UGC नियमों के अनुसार प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज में लोकपाल की नियुक्ति अनिवार्य है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में अधिकांश संस्थानों में लोकपाल नियुक्त किए जा चुके हैं, लेकिन उनकी भूमिका प्रभावी नहीं रही। इसी को ध्यान में रखते हुए अब स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। लोकपाल को स्वतंत्र अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करना होगा और वही मामलों की सुनवाई करेगा, जिनमें छात्र पहले छात्र शिकायत निवारण समिति (SGRC) की प्रक्रिया पूरी कर चुका हो।
जानकारी देना जरूरी
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज अपनी वेबसाइट और प्रॉस्पेक्टस में शिकायत निवारण से जुड़ी पूरी जानकारी प्रदर्शित करें। इसमें SGRC के सदस्यों के नाम, पद और संपर्क विवरण के साथ लोकपाल की जानकारी भी शामिल होगी। साथ ही शिकायत दर्ज करने और अपील की प्रक्रिया को भी स्पष्ट रूप से प्रकाशित करना अनिवार्य होगा, ताकि छात्रों को किसी तरह की असमंजस की स्थिति न हो।
प्रॉस्पेक्टस और प्रवेश प्रक्रिया पर भी सख्ती
कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले प्रॉस्पेक्टस जारी करना होगा। इसमें कोर्स, सीटों की संख्या, फीस, चयन प्रक्रिया, रिफंड नियम, हॉस्टल, लाइब्रेरी और फैकल्टी से जुड़ी जानकारी देना जरूरी होगा। यदि प्रॉस्पेक्टस में गलत जानकारी दी जाती है और छात्र को नुकसान होता है, तो वह SGRC या लोकपाल के पास शिकायत कर सकेगा।
ऑनलाइन शिकायत पोर्टल बनाना होगा अनिवार्य
सरकार ने सभी संस्थानों को ऑनलाइन शिकायत पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए हैं। किसी भी शिकायत को 15 कार्य दिवस के भीतर SGRC को भेजना होगा और सुनवाई तय करनी होगी। यदि छात्र SGRC के निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह 15 दिनों के भीतर लोकपाल के पास अपील कर सकेगा, जहां 30 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
