लांजी विधानसभा से भाजपा विधायक राजकुमार कर्राहे को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह याचिका पूर्व विधायक किशोर समरीते द्वारा दायर की गई थी। सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस डीडी बंसल की एकल पीठ ने याचिका को निरस्त करते हुए विधायक के निर्वाचन को वैध ठहराया।
पूर्व विधायक किशोर समरीते ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 17 नवंबर 2023 को हुए विधानसभा चुनाव में लांजी सीट से राजकुमार कर्राहे के निर्वाचन को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है, इसलिए विधायक का निर्वाचन रद्द किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि किशोर समरीते ने यह चुनाव संयुक्त क्रांति मोर्चा के प्रत्याशी के रूप में लड़ा था।
भाजपा विधायक की ओर से उठाई गई आपत्ति
सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक राजकुमार कर्राहे की ओर से अदालत में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई। उनके वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता किशोर समरीते को एक आपराधिक मामले में 5 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि उनकी सजा फिलहाल निलंबित है, लेकिन समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में एक सजायाफ्ता व्यक्ति को निर्वाचन की वैधता पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
हाईकोर्ट ने विधायक पक्ष की इस आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति की सजा अभी प्रभाव में है, वह चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने की वैधानिक स्थिति में नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर न्यायालय ने किशोर समरीते की याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया।
नामांकन निरस्त होने का भी जिक्र
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि किशोर समरीते को मिली 5 साल की सजा के आधार पर ही नवंबर 2023 में निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था। उस समय निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान समरीते के खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई थी, जिसे सही मानते हुए नामांकन रद्द किया गया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद लांजी विधायक राजकुमार कर्राहे को न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़ी राहत मिली है। आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कर्राहे के निर्वाचन पर उठ रहे सवालों पर फिलहाल विराम लग गया है।
