यूनिवर्सिटी में 5 मार्च से थर्ड और फोर्थ ईयर की परीक्षाओं का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इस महाकुंभ में कुल लगभग 46 हजार छात्र शामिल होंगे। बीए में सबसे अधिक 16,000 छात्र परीक्षा देंगे। इसके अलावा बीकॉम में 11,000, बीएससी में 8,000 और बीबीए तथा बीसीए में कुल 8,000 छात्र शामिल होंगे।
यूनिवर्सिटी ने छात्रों की संख्या के अनुसार परीक्षा केंद्रों का वितरण किया है। बीए के 16,000 छात्रों के लिए 80 कॉलेज परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। बीकॉम के 11,000 छात्रों के लिए 60 कॉलेज, बीएससी के 8,000 छात्रों के लिए 25 कॉलेज और बीबीए-बीसीए के 8,000 छात्रों के लिए 25 कॉलेज परीक्षा केंद्र तैयार किए गए हैं।
यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं का काउंटडाउन शुरू
फोर्थ ईयर (ऑनर्स) में इस साल छात्रों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 50% घट गई है। पिछले साल 3,000 छात्र थे, जो इस साल घटकर केवल 1,500 रह गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नई शिक्षा नीति और चार वर्षीय डिग्री विकल्प के कारण हुआ है। नई शिक्षा नीति के तहत, ग्रेजुएशन में तीन वर्षीय पारंपरिक कोर्स और चार वर्षीय ऑनर्स, दोनों विकल्प छात्रों को उपलब्ध हैं। अधिकांश छात्र तेजी से पीजी या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं। तीन साल का ग्रेजुएशन लेने वाले छात्र पांच साल में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा कर सकते हैं।
चार वर्षीय डिग्री का कम आकर्षण
चार साल की डिग्री लेने वाले छात्रों के लिए पारंपरिक पीजी कोर्स केवल एक साल का रह जाता है और वे सीधे नेट परीक्षा के जरिए पीएचडी के पात्र बन सकते हैं। लेकिन एमबीए, एमसीए और बीएड जैसे प्रोफेशनल पीजी कोर्स अब भी दो साल के ही हैं। इस कारण छात्रों को अतिरिक्त साल देने का कोई विशेष लाभ नहीं दिख रहा।
छात्र तेजी से प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेना चाहते हैं और इसलिए तीन साल की डिग्री लेना अधिक लाभकारी समझ रहे हैं। चार वर्षीय ऑनर्स में कम संख्या में छात्रों के होने का यही मुख्य कारण माना जा रहा है।
