ग्वालियर जिला अदालत ने बिना वैध पंजीयन के एलोपैथी उपचार करने और लापरवाही के चलते मरीज की मौत के मामले में बोधराज शास्त्री को दोषी ठहराते हुए दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर चार हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। यह फैसला मध्य प्रदेश आयुर्वेद विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 24 के तहत सुनाया गया।
घटना 22 जनवरी 2022 की है, जब हजीरा क्षेत्र में बोधराज शास्त्री अपने क्लीनिक में मरीजों का इलाज कर रहे थे। धर्मेंद्र सिंह तोमर इलाज के लिए उनके पास पहुंचे। आरोप है कि इलाज के दौरान बोधराज शास्त्री ने डीएस बोतल के जरिए गलत इंजेक्शन और दवा दी, जिससे धर्मेंद्र की हालत अचानक गंभीर हो गई।
ग्वालियर बिना वैध पंजीयन एलोपैथी उपचार
परिजन धर्मेंद्र सिंह को तुरंत जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। पुलिस जांच में पता चला कि बोधराज शास्त्री के पास एलोपैथी चिकित्सा करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। इसके अलावा, उसने इलाज में गंभीर लापरवाही बरती। जांच में मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर अभियोजन ने अदालत में आरोप साबित किए।
अदालत की सुनवाई और सजा
सुनवाई के दौरान सभी सबूतों और गवाहों के ब्योरे की जांच के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को दो साल का कठोर कारावास और चार हजार रुपए का अर्थदंड देने का आदेश दिया।
यह मामला चिकित्सकों और मरीजों के बीच भरोसे की अहमियत को उजागर करता है। बिना वैध पंजीयन के इलाज गंभीर परिणाम दे सकता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखने और दंडात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
