जबलपुर में एप्स्टीन फाइल्स विवाद से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पहली एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई नगर निगम जबलपुर के कार्यपालन यंत्री की शिकायत पर की गई। शिकायत में आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एआई जनरेटेड तस्वीरों के जरिए शहर में भ्रामक पोस्टर लगाए जाने का दावा किया गया।
बताया गया है कि इंडियन यूथ कांग्रेस से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल से कुछ तस्वीरें पोस्ट की गई थीं। इन तस्वीरों में जबलपुर शहर के विभिन्न स्थानों पर कथित यूनिपोल पोस्टर दिखाए गए थे। आरोप है कि इन पोस्टरों में प्रधानमंत्री को लेकर आपत्तिजनक सामग्री प्रदर्शित की गई, जबकि हकीकत में ऐसे पोस्टर संबंधित स्थानों पर लगाए ही नहीं गए थे।
जबलपुर में AI पोस्टर विवाद
शिकायत के आधार पर ओमती थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 197-ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला भ्रामक और असत्य जानकारी फैलाने से जुड़ा प्रतीत होता है। एफआईआर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई है और साइबर पहलुओं को भी ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच में सामने आए दो पोस्ट
सीएसपी रितेश कुमार शिव के अनुसार, जांच के दौरान अब तक दो पोस्ट सामने आए हैं। एक पोस्ट में कार्टून चित्र दर्शाया गया है, जबकि दूसरे में अमेरिका और भारत के प्रधानमंत्रियों की तस्वीर दिखाई गई है। पुलिस ने संबंधित यूनिपोल स्थल का भौतिक सत्यापन किया। मौके पर पहुंची टीम ने पाया कि वहां किसी अन्य एजेंसी के वैध और अधिकृत पोस्टर लगे थे।
भ्रामक सूचना फैलाने की आशंका
प्राथमिक जांच में यह संकेत मिला है कि वायरल तस्वीरें वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खातीं। पुलिस का कहना है कि यदि एआई तकनीक का उपयोग कर फर्जी या भ्रामक सामग्री तैयार कर सार्वजनिक मंच पर प्रसारित की गई है, तो यह गंभीर मामला है। फिलहाल डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा रहा है और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच की जा रही है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी तस्वीर या सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें, ताकि अफवाहों और भ्रामक प्रचार से बचा जा सके।
