फिल्म पर लोंगेवाला के पूर्व हवलदार का दावा, बोले- असली युद्ध की कहानी अलग थी

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Published On: 13 February 2026

1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित फिल्म Border एक बार फिर चर्चा में है। इस बार विवाद फिल्म की कहानी को लेकर खड़ा हुआ है। लोंगेवाला की लड़ाई में शामिल रहे पूर्व हवलदार मुख्तियार सिंह ने दावा किया है कि फिल्म में युद्ध की घटनाओं को वास्तविकता से अलग तरीके से दिखाया गया।

“मोर्चे पर 120 जवान थे, सिर्फ तीन शहीद हुए”

मोहाली निवासी 81 वर्षीय मुख्तियार सिंह के अनुसार, 4-5 दिसंबर 1971 की रात लोंगेवाला पोस्ट पर कुल 120 भारतीय जवान तैनात थे। उनका कहना है कि उस युद्ध में भारतीय सेना की ओर से केवल तीन जवानों की शहादत हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में अधिकांश सैनिकों को शहीद दिखाया गया, जो वास्तविक घटनाओं से मेल नहीं खाता।

45 पाकिस्तानी टैंकों की दी थी सूचना

पूर्व हवलदार ने बताया कि उस समय पाकिस्तान की ओर से लगभग 45 टैंक भारतीय सीमा की ओर बढ़े थे। उन्होंने दावा किया कि सबसे पहले उन्होंने ही टैंकों की गतिविधि देखी और वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद जवानों को सतर्क किया गया और पूरी तैयारी के साथ मुकाबला किया गया।

सरकार को लिखे पत्र, सम्मान की मांग

मुख्तियार सिंह ने कहा कि पिछले दो वर्षों से वे इस मामले को लेकर सरकार को पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को भी अपनी बात भेजी है। उनका कहना है कि वे किसी आर्थिक लाभ की मांग नहीं कर रहे, बल्कि चाहते हैं कि युद्ध में शामिल असली सैनिकों को उचित सम्मान मिले और इतिहास को सही रूप में प्रस्तुत किया जाए।

कलाकारों से मिलने की इच्छा

उन्होंने अभिनेता सनी देओल का नाम लेते हुए कहा कि यदि संभव हो तो वे उन सैनिकों से मिलें जिन्होंने वास्तविक लड़ाई लड़ी थी। उनका मानना है कि फिल्मों के जरिए जब ऐतिहासिक घटनाएं दिखाई जाती हैं, तो तथ्यों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

“हम असली हीरो थे, लेकिन कोई नहीं पूछता”

मुख्तियार सिंह ने कहा कि लोंगेवाला की लड़ाई में शामिल कई सैनिकों को अब तक कोई बड़ा सैन्य सम्मान नहीं मिला। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय के बहुत कम सैनिक अब जीवित बचे हैं। ऐसे में वे चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए और आने वाली पीढ़ी को सही इतिहास बताया जाए।

फिलहाल इस मामले पर फिल्म से जुड़े किसी कलाकार या निर्माता की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पूर्व सैनिक के इन दावों के बाद एक बार फिर लोंगेवाला युद्ध और उस पर बनी फिल्म की प्रामाणिकता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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