MP की Government of Madhya Pradesh ने राजस्थान के पशुपालकों को बड़ी राहत देते हुए ऊंट, भेड़ और अन्य पशुओं की चराई के लिए नया कॉरिडोर खोल दिया है। करीब 40 साल बाद चराई मार्गों में बदलाव किया गया है। अब प्रदेश में पांच अधिकृत मार्गों से राजस्थान के पशुपालक अपने पशुओं के साथ प्रवेश कर सकेंगे। इस फैसले से परंपरागत रूप से होने वाली मौसमी आवाजाही को कानूनी और प्रशासनिक सहूलियत मिलेगी।
सरकार द्वारा स्वीकृत पांचवां मार्ग Damoh, Narsinghpur, Katni, Jabalpur, Dindori और Amarkantak से होते हुए Chhattisgarh की सीमा तक जाएगा। इस मार्ग से राजस्थान के पशुपालक अपने पशुओं को चराते हुए लंबी दूरी तय कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे चराई के दौरान अनावश्यक रोक-टोक कम होगी और पशुपालकों को प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे।
MP में पशुओं के लिए नया कॉरिडोर मंजूर
प्रदेश में अन्य राज्यों के पशुओं को चराई की अनुमति देने के लिए वर्ष 1986 में नियम बनाए गए थे। उसी ढांचे के तहत अब पांचवें मार्ग को औपचारिक मंजूरी दी गई है। पहले से चार मार्ग अधिकृत थे, जिनके जरिए राजस्थान से आने वाले पशु अलग-अलग जिलों से गुजरते थे। नए मार्ग के जुड़ने से दबाव का बंटवारा होगा और पशुओं के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध रहेगा।
पहले से तय 4 प्रमुख मार्ग
- पहला मार्ग Sawai Madhopur से माली घाट और Chambal River होते हुए Sheopur, कराहल, जोहरी, Shivpuri, मोहन्ना, Gwalior और Bhind से होकर Etawah (यूपी) तक जाता है।
- दूसरा मार्ग Shahbad से Guna, ईसागढ़ और Chanderi होते हुए Lalitpur तक जाता है।
- तीसरा मार्ग इकलेरा (राजस्थान) से राजगढ़, लटेरी और सिरोंज होते हुए भी ललितपुर की ओर निकलता है।
- चौथा मार्ग गुजरात से आने वाले पशुओं के लिए है, जो Jhabua, Dhar, Barwani, Khargone, Khandwa और Burhanpur से होते हुए Maharashtra की सीमा तक पहुंचता है।
पशुपालकों को मिलेगी राहत
नए कॉरिडोर से राजस्थान के पशुपालकों को लंबी दूरी की पारंपरिक चराई व्यवस्था में सहूलियत मिलेगी। प्रशासन का मानना है कि अधिकृत मार्ग होने से स्थानीय स्तर पर विवाद और अवरोध कम होंगे, साथ ही पशुओं की आवाजाही व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी।
