एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशिएलिटी सीटों का विस्तार, एमसीएच न्यूरोसर्जरी 2 से बढ़कर 5

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Published On: 22 February 2026

इंदौर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशिएलिटी पाठ्यक्रमों के विस्तार को मंजूरी मिल गई है। नेशनल मेडिकल कमीशन ने एमसीएच न्यूरोसर्जरी की सीटें 2 से बढ़ाकर 5 करने की स्वीकृति दी है। इसके साथ ही संस्थान में अब न्यूरोलॉजी की 4, पीडियाट्रिक सुपर स्पेशिएलिटी की 2 और कार्डियोलॉजी की 2 सीटों सहित कुल 13 सुपर स्पेशिएलिटी सीटें संचालित होंगी। कॉलेज प्रबंधन इसे शैक्षणिक उपलब्धि मान रहा है और उम्मीद जता रहा है कि इससे संस्थान की अकादमिक साख और मजबूत होगी।

कॉलेज में पहले से ब्रॉड स्पेशिएलिटी पीजी की 283 सीटें संचालित हैं। प्रबंधन के अनुसार सत्र 2026-27 के लिए 72 अतिरिक्त सीटों का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इतना ही नहीं, 22 और सुपर स्पेशिएलिटी सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो कॉलेज प्रदेश के प्रमुख मेडिकल शिक्षण संस्थानों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। हालांकि इस विस्तार के साथ संसाधनों और फैकल्टी की उपलब्धता को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज

न्यूरोसर्जरी विभाग में सीटें बढ़ने के बीच विभागाध्यक्ष चार महीने पहले इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में नए शैक्षणिक सत्र से पहले विभागीय नेतृत्व और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज है। जानकारों का कहना है कि सुपर स्पेशिएलिटी कोर्स की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अनुभवी फैकल्टी, आधुनिक उपकरण और समर्पित इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। विस्तार के साथ इन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा।

घटी मरीजों की संख्या

कॉलेज से संबद्ध एमवाय अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में हाल के महीनों में मरीजों की संख्या करीब 30 प्रतिशत तक कम हुई है। वार्ड में बेड ऑक्यूपेंसी लगभग 50 प्रतिशत रह गई है। ट्रॉमा केस लगातार आ रहे हैं, लेकिन सामान्य न्यूरोसर्जरी के मरीज निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। करीब डेढ़ साल पहले समर्पित ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक उपकरणों की कमी की शिकायतें भी सामने आई थीं, जिसका असर विभाग की कार्यक्षमता पर पड़ा।

कॉलेज प्रशासन ने जताया भरोसा

कॉलेज के डीन का कहना है कि एमसीएच कोर्सेज में सीटों का बढ़ना संस्थान के लिए गौरव की बात है। इससे न्यूरोसर्जरी जैसे जटिल क्षेत्र में अधिक कुशल विशेषज्ञ तैयार होंगे और प्रदेश को प्रशिक्षित डॉक्टर मिल सकेंगे। प्रशासन का दावा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी से जुड़ी कमियों को दूर कर जल्द ही मरीजों का भरोसा दोबारा मजबूत किया जाएगा।

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