ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में रविवार से तीन दिवसीय ‘कृषि मंथन-2026’ की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य बदलते मौसम, बढ़ती उत्पादन लागत और घटती पैदावार जैसी चुनौतियों के बीच खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। विश्वविद्यालय परिसर में इस तरह का ब्रेन स्टॉर्मिंग आयोजन पहली बार हो रहा है, जिसे लेकर किसानों और कृषि विशेषज्ञों में उत्साह देखा गया।
मंथन का आयोजन दत्तोपंती थेगड़ी सभागार में किया जा रहा है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ जुटे हैं। वे उन्नत तकनीकों, नई फसल पद्धतियों और आधुनिक कृषि मॉडल पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।
ग्वालियर में ‘कृषि मंथन-2026’
उद्घाटन सत्र में भारतीय कृषि अनुसंधान के उप महानिदेशक डॉ. डीके यादव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने की। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते जलवायु परिदृश्य में वैज्ञानिक खेती ही भविष्य का रास्ता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित विशेष फसलों और आधुनिक तकनीकों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें उन्नत बीज, जैविक खेती के मॉडल, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और डेयरी प्रबंधन से जुड़े नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। बड़ी संख्या में किसानों ने स्टॉलों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से जानकारी ली। आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आयोजन से शोध और खेत के बीच की दूरी कम होगी।
प्रगतिशील किसानों का सम्मान
मंच पर कृषि और डेयरी क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों और उद्यमियों को सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान उन लोगों को दिया गया, जिन्होंने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाया और दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया।
भितरवार से आए डेयरी उद्यमी प्रशांत सिंह पवैया को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों से वे डेयरी फार्मिंग से जुड़े हैं। नौकरी छोड़कर उन्होंने इस क्षेत्र में शोध किया, एक सोसायटी बनाई और उन्नत नस्ल की भैंसों के पालन से इसे अपने जीवन का मुख्य व्यवसाय बना लिया। आज वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी डेयरी व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
