सियासत में एंट्री करेंगे अरिजीत सिंह? जियागंज से उठे हर सवाल का जवाब

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Published On: 5 February 2026

पिछले एक दशक से हिंदी सिनेमा की भावनाओं की पहचान बन चुकी आवाज अगर अचानक थम जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। अरिजीत सिंह, जिनके गानों के बिना आज किसी प्रेम कहानी, ब्रेकअप या यादों की प्लेलिस्ट अधूरी लगती है, अब उसी अरिजीत को लेकर अजीब-सी बेचैनी है। वजह है उनका प्लेबैक सिंगिंग से ब्रेक लेने का ऐलान और उसके बाद अचानक बढ़ी खामोशी।

इस खामोशी ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है- क्या अरिजीत सिंह अब राजनीति में कदम रखने वाले हैं?

जियागंज लौटे अरिजीत सिंह

प्लेबैक गायकी से दूरी बनाकर अरिजीत सिंह अपने घर, पश्चिम बंगाल के छोटे से शहर जियागंज लौट आए हैं। चुनावी माहौल है, बंगाल में सियासी हलचल भी है, इसलिए कयास लगने लगे कि शायद अरिजीत कोई नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। लेकिन जियागंज के लोग इस सवाल पर मुस्कुरा देते हैं। यहां के लोग एक ही बात कहते हैं  “राजनीति और अरिजीत? ना दादा, एटा होबे ना।”

जो लोग अरिजीत को बचपन से जानते हैं, उनके लिए यह सवाल ही बेमानी है। अरिजीत कभी भीड़ पसंद नहीं करते, मंच पर जरूर हजारों लोगों के सामने गाते हैं, लेकिन निजी जिंदगी में हमेशा सादगी और दूरी बनाए रखते हैं।

सवालों से दूरी

ब्रेक की घोषणा के बाद न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, न कोई इंटरव्यू। परिवार के लोग भी चुप हैं। अरिजीत खुद सोशल मीडिया पर भी कुछ नहीं कह रहे। फोन, मैसेज, मीडिया सब से दूरी है।

जो अरिजीत कभी स्कूटी पर बैठकर बाजार निकल जाते थे, अब दिखाई नहीं देते। उनका दायरा सिमटकर घर और स्टूडियो तक रह गया है। यहां तक कि हाल ही में आमिर खान जियागंज आए, तस्वीरें वायरल हुईं, लेकिन अरिजीत कहीं नजर नहीं आए। उनका निजी स्टूडियो घर के पास ही है, जहां बायोमीट्रिक एंट्री है। वहीं वह घंटों संगीत में डूबे रहते हैं। गुनगुनाते हैं, रचते हैं, सोचते हैं।

जियागंज का भरोसा

इस पूरे दौर में जियागंज की एक बात दिल जीत लेती है। यहां कोई उनके घर के बाहर कैमरा लेकर नहीं खड़ा होता। कोई शोर नहीं, कोई जबरदस्ती नहीं। लोग अरिजीत की निजता का सम्मान करते हैं। क्योंकि अरिजीत कभी यहां “स्टार” बनकर नहीं आए। वह हमेशा यहीं के रहे कम बोलने वाले, नजर झुकाकर बात करने वाले, आम इंसान जैसे।

संगीत से बना रिश्ता

अरिजीत का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। उनके परिवार की जड़ें लाहौर से जुड़ी हैं, लेकिन किस्मत उन्हें जियागंज ले आई। मां अदिति सिंह खुद गायिका थीं। घर में तबला, रियाज़ और सुरों का माहौल था। गुरुद्वारे के शबद-कीर्तन से लेकर स्कूल के मंच तक, अरिजीत का सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। फिर रियलिटी शो, संघर्ष और आखिरकार ‘तुम ही हो’। उस एक गाने ने सब कुछ बदल दिया। इसके बाद अरिजीत रुके नहीं। शायद इसलिए अब रुकना चाहते हैं।

तो क्या राजनीति में आएंगे अरिजीत?

जियागंज वाले साफ कहते हैं= राजनीति नहीं। वह कुछ बड़ा जरूर कर रहे हैं, लेकिन वह सत्ता की कुर्सी नहीं होगी। शायद नया संगीत।
शायद खुद के लिए। शायद दुनिया से थोड़ी दूरी। अरिजीत सिंह कभी शोर मचाकर नहीं चलते। जो भी करेंगे, चुपचाप करेंगे और जब लौटेंगे, तो सुरों के साथ।

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