जब खलनायक पर भारी पड़ता था हीरो, 400 फिल्मों का सफर, लीड एक्टर से ज्यादा फीस

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Published On: 19 February 2026

हिंदी सिनेमा में हीरो की चमक-दमक हमेशा सुर्खियों में रहती है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब पर्दे पर खलनायक की एंट्री होते ही दर्शकों की धड़कनें तेज हो जाती थीं। उस समय एक नाम ऐसा था, जिसे देखते ही लोग समझ जाते थे कि अब कहानी में तूफान आने वाला है। ये नाम था Pran।

प्राण साहब सिर्फ एक विलेन नहीं थे, वो अपने आप में एक संस्था थे। कहा जाता है कि वो जिस किरदार को निभाते थे, उसमें पूरी तरह ढल जाते थे। उनकी आंखों का अंदाज, संवाद बोलने का तरीका और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी इतनी दमदार होती थी कि लोग असल जिंदगी में भी उनसे खौफ खाने लगे थे। कई बच्चे तो उन्हें देखकर रो पड़ते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि ये सच में बुरे इंसान हैं।

दिलचस्प बात ये है कि प्राण ने अपने करियर की शुरुआत हीरो के तौर पर नहीं, बल्कि खलनायक के रूप में पहचान बनाकर की। आजादी से पहले भी उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। कहते हैं कि उन्हें पहली फिल्म का मौका एक पान की दुकान पर मिला था। वहां किसी फिल्मी शख्स की नजर उन पर पड़ी और किस्मत का पहिया घूम गया।

करीब छह दशक लंबे करियर में उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उस दौर में जब हीरो सबसे ज्यादा फीस लेते थे, प्राण एक ऐसे कलाकार थे जो नेगेटिव रोल के लिए लीड एक्टर से ज्यादा पैसे वसूलते थे। ये अपने आप में बड़ी बात थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी मांग कितनी ज्यादा थी और निर्माता-निर्देशक उन्हें अपनी फिल्म में लेने के लिए कितने उत्सुक रहते थे।

उनकी फिल्मोग्राफी पर नजर डालें तो कई यादगार फिल्में सामने आती हैं Madhumati, Devdas, Ram Aur Shyam, Don और Kaalia जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। हर फिल्म में उनका अंदाज अलग होता था, लेकिन असर उतना ही गहरा।

हालांकि, उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ 1973 में आई फिल्म Zanjeer से आया। इस फिल्म में उन्होंने ‘शेर खान’ का किरदार निभाया था। दिलचस्प बात ये रही कि इस रोल में वो पूरी तरह नेगेटिव नहीं थे, बल्कि एक मजबूत और असरदार शख्सियत के रूप में सामने आए। उनका पठानी अंदाज, दाढ़ी-मूंछ और दमदार डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

‘जंजीर’ में अमिताभ बच्चन हीरो थे, लेकिन शेर खान का किरदार भी उतना ही चर्चित हुआ। इसी फिल्म के बाद प्राण को सिनेमा का ‘शेर खान’ कहा जाने लगा। ये टैग उनके साथ जिंदगी भर जुड़ा रहा।

प्राण साहब की खासियत ये थी कि वो अपने किरदार से दर्शकों को नफरत करने पर मजबूर कर देते थे, और यही एक सच्चे कलाकार की पहचान है। बाद के सालों में उन्होंने पॉजिटिव रोल भी किए और साबित किया कि वो हर तरह के किरदार में जान डाल सकते हैं।

आज जब हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की बात होती है, तो प्राण का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। वो सिर्फ एक विलेन नहीं थे, बल्कि वो उस दौर की पहचान थे एक ऐसा कलाकार जिसने साबित किया कि कहानी का असली वजन कभी-कभी हीरो नहीं, बल्कि खलनायक संभालता है।

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