जमानत के बाद भी तिहाड़ में क्यों हैं राजपाल यादव? फिल्म फ्लॉप, कर्ज बढ़ा और जेल तक पहुंची बात

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Published On: 17 February 2026

कॉमेडी से लोगों को हंसाने वाले मशहूर अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों एक अलग ही वजह से चर्चा में हैं। दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद भी वह तिहाड़ जेल से तुरंत बाहर नहीं आ पाए। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठना लाजिमी है—जब जमानत मिल गई तो फिर रिहाई में देरी क्यों?

दरअसल मामला थोड़ा कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है। सोमवार को अदालत ने 9 करोड़ रुपये के कर्ज मामले में 2.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद उन्हें अंतरिम बेल दे दी। कोर्ट का आदेश आते ही उनके वकीलों ने कागजी कार्रवाई शुरू कर दी, लेकिन जमानत मिलना और जेल से बाहर आना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं होती हैं।

जमानत के बाद भी जेल क्यों?

कोर्ट के आदेश के बाद जरूरी दस्तावेज तैयार किए गए। लेकिन जेल से रिहाई के लिए वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होती है। यह प्रक्रिया अगले दिन दोपहर तक पूरी हो सकी। उसके बाद ही जमानत का आदेश तिहाड़ जेल प्रशासन तक पहुंचाया गया।

यानी देरी का कारण कोई नया केस या अड़चन नहीं, बल्कि सामान्य कानूनी औपचारिकताएं थीं। उम्मीद जताई गई थी कि सभी फॉर्मैलिटी पूरी होने के बाद वह शाम तक रिहा हो जाएंगे। रिहाई के बाद उनकी योजना सीधे उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जाने की है, जहां वह अपनी भतीजी की शादी में शामिल होना चाहते हैं।

कब और कैसे शुरू हुआ मामला?

इस पूरे विवाद की जड़ साल 2012 में बनी फिल्म Ata Pata Laapata से जुड़ी है। बताया जाता है कि इस फिल्म को बनाने के लिए राजपाल यादव ने मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये उधार लिए थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और आर्थिक नुकसान हुआ।

समय बीतने के साथ कर्ज पर ब्याज और पेनल्टी जुड़ती गई। साथ ही चेक बाउंस का मामला भी सामने आया। देखते ही देखते 5 करोड़ की रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। 5 फरवरी को जब अदालत ने और समय देने की उनकी अपील खारिज कर दी, तब उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया।

कोर्ट की शर्तें क्या हैं?

दिल्ली हाई कोर्ट ने 16 फरवरी को उन्हें अंतरिम जमानत दी, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा और बिना इजाजत देश से बाहर नहीं जा सकते। इस तरह की शर्तें आमतौर पर इसलिए लगाई जाती हैं ताकि आरोपी जांच या आगे की सुनवाई में सहयोग करे और कहीं बाहर न चला जाए।

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