फुलेरा दूज पर फूलों की होली से सजेगा ब्रज, मंदिरों में बरसे फूल, जानें महत्व

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Published On: 17 February 2026
ज्योतिष : हिंदू धर्म में फुलेरा दूज का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यह पर्व बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ फूलों की होली खेली थी, जिसके कारण इस पर्व को खास महत्व मिला है। इस अवसर पर मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, जहां भक्त फूलों की होली खेलकर उत्सव मनाते हैं। ब्रज क्षेत्र में इसी दिन से होली पर्व की शुरुआत मानी जाती है। साथ ही, फुलेरा दूज को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है, इसलिए इस दिन विवाह, शुभ कार्य और मांगलिक कार्यक्रम बिना मुहूर्त देखे किए जाते हैं।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला फुलेरा दूज का त्योहार प्रेम, सौहार्द और वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन विशेष रूप से शुभ होता है और इसे साल के सबसे उत्तम मुहूर्तों में शामिल किया गया है।

फुलेरा दूज

फाल्गुन माह में मनाई जाने वाली फुलेरा दूज का पर्व इस बार देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में इस अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां मंदिरों को फूलों से सजाया गया और भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने फूलों की होली खेलकर इस दिन को उल्लासपूर्वक मनाया। खासतौर पर बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां फूलों की वर्षा के बीच भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन हुआ। मान्यता है कि फुलेरा दूज से ही होली उत्सव की शुरुआत हो जाती है, इसलिए लोग इस दिन प्रेम, आनंद और आध्यात्मिक वातावरण के साथ रंगों के त्योहार का स्वागत करते हैं।

महत्व

फुलेरा दूज का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और इसे होली उत्सव की शुरुआत का शुभ संकेत माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से वृंदावन और मथुरा सहित कई स्थानों पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को फूलों से सजाया जाता है तथा फूलों की होली खेली जाती है। मान्यता है कि इस दिन बिना मुहूर्त के भी विवाह, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, क्योंकि यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। भक्त इस अवसर पर मंदिरों में पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करते हैं।

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