आमलकी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और इसका पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। आमलकी एकादशी 27 फरवरी को रखी गई है और इसका पारण आज किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु का प्रिय माना गया है। भक्त सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं, दिनभर उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु-माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। भक्तों को हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत तोड़ना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य तथा ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न देकर पारण करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पारण करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है और सुख-समृद्धि, पापों से मुक्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
आमलकी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से उपवास रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु का प्रिय माना गया है। इस व्रत का पारण आज किया जायेगा ।
आमलकी एकादशी व्रत का पारण
आमलकी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि-विधान के साथ किया जाता है। इस दिन व्रती प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद व्रत खोलते हैं। पारण के समय पहले तुलसी युक्त जल या चरणामृत ग्रहण किया जाता है, फिर सात्विक भोजन लिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पारण द्वादशी तिथि के भीतर ही करना शुभ माना जाता है, क्योंकि निर्धारित समय के बाद व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। कई भक्त इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं और दान-पुण्य भी करते हैं, जिससे व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। आमलकी एकादशी का पारण श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
शुभ मुहूर्त
आमलकी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी को किया जाएगा। पारण के लिए सुबह 06 बजकर 47 मिनट से 09 बजकर 06 मिनट तक का शुभ समय निर्धारित है, इसलिए श्रद्धालुओं को इसी अवधि के भीतर व्रत खोल लेना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के अंदर करना अत्यंत आवश्यक होता है।
पूजा विधि
- आमलकी एकादशी व्रत का पारण आज द्वादशी तिथि में विधि-विधान से किया जाएगा।
- इस दिन श्रद्धालु सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान का ध्यान करें।
- स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित कर श्रीहरि की पूजा करें, दीप जलाएं तथा फल, फूल और तुलसी दल चढ़ाएं।
- पारण से पहले ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा या कच्चा अनाज देना शुभ माना गया है, इसके बाद ही व्रत खोलना चाहिए।
- आमलकी एकादशी के पारण में आंवले का फल ग्रहण करना या भगवान को अर्पित किया गया भोग खाना विशेष फलदायी माना जाता है।
- साथ ही व्रत खोलने के बाद भी पूरे दिन सात्विक और शाकाहारी भोजन करने की परंपरा है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
