फरवरी 2019 में केंद्र की Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत MP के किसानों को सालाना 6 हजार रुपए तीन किश्तों में दिए जाते हैं। उस समय मध्य प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त 6 हजार रुपए देने का निर्णय लिया था। इस तरह प्रदेश के किसानों को कुल 12 हजार रुपए सालाना मिलते रहे हैं।
हाल ही में संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान 1,66,254 किसान योजना के लाभार्थियों की सूची से बाहर हो गए हैं। राज्यसभा में दी गई जानकारी बताती है कि नवंबर 2022 में 11वीं किश्त के समय प्रदेश में लाभार्थियों की संख्या 83,48,005 थी, जो दिसंबर 2025 में 19वीं किश्त तक घटकर 81,81,751 रह गई। इस गिरावट ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
MP विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक Sujit Singh Choudhary ने आरोप लगाया कि धीरे-धीरे किसानों को योजना से बाहर किया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले ही 1.66 लाख किसान सूची से बाहर हो चुके हैं और जो राशि मिलती है, वह भी पर्याप्त नहीं है। वहीं, कृषि मंत्री Edal Singh Kansana ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योजना से किसी किसान को जानबूझकर बाहर नहीं किया गया है।
ई-केवाईसी बड़ी वजह
लाभार्थियों की संख्या में कमी के पीछे तकनीकी कारण भी सामने आए हैं। प्रदेश के 74,271 किसानों की किश्तें केवल इसलिए रुकी हुई हैं क्योंकि उनका ई-केवाईसी सत्यापन पूरा नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही संबंधित किसान अपनी प्रक्रिया पूरी करेंगे, उन्हें दोबारा लाभ मिलने लगेगा।
राशि वितरण में भी आई कमी
लाभार्थियों की संख्या घटने का असर बजट पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2022 में प्रति किश्त 1,730.12 करोड़ रुपए वितरित किए गए थे, जबकि 2025 में यह राशि घटकर 1,636.35 करोड़ रुपए रह गई। यानी प्रति किश्त करीब 93.77 करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ई-केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर कितने किसानों को दोबारा योजना का लाभ मिल पाता है।
