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भोपाल में लगाए गए 1.89 लाख स्मार्ट मीटर, ज्यादा बिल आने की 547 शिकायतें; सभी निकली गलत

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Published On: 11 August 2025

भोपाल | राजधानी भोपाल में स्मार्ट मीटर को लेकर जारी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले एक महीने में राजधानी में पांच बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद बिजली कंपनी ने पहली बार सार्वजनिक मंच पर इन मीटरों के फायदे गिनाए और आरोपों को खारिज किया। सोमवार को आयोजित दो घंटे की कार्यशाला में अधिकारियों ने दावा किया कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह सही रीडिंग दे रहे हैं और अब तक की जांच में अधिक खपत या गड़बड़ी का कोई मामला साबित नहीं हुआ है।

कम रीडिंग दर्ज

डिप्टी चीफ इंजीनियर बी.बी.एस. परिहार ने जानकारी दी कि सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से स्मार्ट मीटर को लेकर कुल 547 शिकायतें मिली थीं। सभी मामलों की जांच की गई और किसी में भी मीटर तेज चलने या बिल गलत आने की बात साबित नहीं हुई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ उपभोक्ताओं के पुराने मीटर में तकनीकी खराबी के कारण कम रीडिंग दर्ज हो रही थी। स्मार्ट मीटर लगने के बाद सही आंकड़े सामने आने से बिल बढ़ा है, लेकिन यह सभी पर लागू नहीं होता।

लगाए स्मार्ट मीटर

भोपाल में अब तक 1,89,082 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 7,372 उपभोक्ताओं के यहां अतिरिक्त रूप से सामान्य डिजिटल मीटर भी लगाए गए हैं, ताकि रीडिंग का मिलान किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि दोनों मीटरों में खपत में कोई अंतर नहीं पाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 16 जिलों में कुल 41 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य है, जिसमें भोपाल में दो निजी कंपनियां यह काम कर रही हैं।

कंपनी का तर्क है कि सामान्य इलेक्ट्रॉनिक मीटर और स्मार्ट मीटर दोनों में खपत दर्ज करने का तरीका एक जैसा है, फर्क सिर्फ इतना है कि स्मार्ट मीटर में रीडिंग रिमोटली ली जाती है, जिससे मानवीय त्रुटि की संभावना खत्म हो जाती है। स्मार्ट मीटर सेल के प्रभारी सी.के. पंवार ने कहा कि अगर किसी उपभोक्ता को बिल अधिक लग रहा है तो वे शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिसकी जांच की जाएगी।

गुस्सा नहीं हुआ कम

हालांकि, इन दावों के बावजूद जनता का गुस्सा कम नहीं हुआ है। गोविंदपुरा समेत कई इलाकों में प्रदर्शन हो चुके हैं। कांग्रेस के साथ कुछ बीजेपी विधायक भी खुले तौर पर कह चुके हैं कि जनता इन मीटरों से परेशान है। विपक्ष का आरोप है कि स्मार्ट मीटर के नाम पर लोगों से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने भी विरोध का ऐलान करते हुए कहा कि गरीब उपभोक्ताओं को मनमाने बिल थमाए जा रहे हैं और पुराने बकाए के नाम पर दबाव डाला जा रहा है।

दी चेतावनी

मामले में एक नया विवाद तब जुड़ गया जब दिल्ली की एक सलाहकार संस्था ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि स्मार्ट मीटर परियोजना में सऊदी अरब की एक कंपनी शामिल है, जिसमें पाकिस्तान के कुछ वरिष्ठ कर्मचारी भी हैं। संस्था ने इसे साइबर सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। कंपनी ने इस पर कहा कि मामला वरिष्ठ स्तर पर जांच में है।

कुल मिलाकर, भोपाल में स्मार्ट मीटर को लेकर बहस तेज होती जा रही है। एक तरफ कंपनी इनके लाभ और पारदर्शिता पर जोर दे रही है, तो दूसरी ओर उपभोक्ताओं और राजनीतिक दलों का एक तबका इसे जेब पर बोझ और सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा है।

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