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भोपाल में 204 करोड़ के स्वास्थ्य प्रोजेक्ट अटके: भवन तैयार, लेकिन इलाज अब भी दूर

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Published On: 26 February 2026

भोपाल में करीब 204 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किए गए स्वास्थ्य प्रोजेक्ट आम लोगों के लिए अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। कई इमारतें लगभग बनकर तैयार हैं, लेकिन औपचारिक प्रक्रियाएं और तकनीकी अड़चनें काम में देरी की वजह बन रही हैं। दो से तीन बार समयसीमा निकल चुकी है, फिर भी अस्पतालों में सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। इसका सीधा असर शहर के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

अधिकारियों के अनुसार कुछ जगहों पर अतिक्रमण हटाने का काम बाकी है, तो कहीं एसटीपी-ईटीपी, फायर टैंक और हैंडओवर जैसी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो पाईं। भवन खड़े हैं, लेकिन तकनीकी अनुमतियां और अंतिम निरीक्षण पूरे न होने से संचालन शुरू नहीं किया जा सका। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के उद्देश्य से शुरू किए गए ये प्रोजेक्ट फिलहाल कागजी प्रक्रिया में उलझे हुए हैं।

भोपाल में 204 करोड़ के स्वास्थ्य प्रोजेक्ट अटके

राजधानी में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख परियोजनाएं शुरू की गई थीं। इनमें जेपी अस्पताल का पांच मंजिला नया भवन, सुल्तानिया अस्पताल का 300 बिस्तरीय सिविल अस्पताल, बैरागढ़ में 100 बिस्तरीय मॉड्यूलर मेटरनिटी विंग, बैरसिया में 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल और रातीबड़ में 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं और निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन संचालन शुरू नहीं होने से सुविधाएं जनता तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

सुल्तानिया अस्पताल की नई समयसीमा

300 बिस्तरों वाले सुल्तानिया सिविल अस्पताल का निर्माण पीआईयू/पीडब्ल्यूडी द्वारा कराया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत करीब 120 करोड़ रुपए बताई गई है। फिलहाल भवन का काम फिनिशिंग स्तर पर है। विभाग ने इसकी संभावित पूर्णता की नई समयसीमा अगस्त 2026 तय की है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य स्ट्रक्चर तैयार है और अब इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल फिटिंग, एचवीएसी सिस्टम, उपकरण स्थापना और टेस्टिंग का कार्य जारी है।

जनता को राहत कब?

स्थानीय लोगों का कहना है कि नए अस्पताल शुरू होने से उन्हें पास में बेहतर इलाज मिल सकेगा और बड़े अस्पतालों पर दबाव भी कम होगा। फिलहाल मरीजों को शहर के चुनिंदा अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां पहले से ही भीड़ बनी रहती है। अब नजर इस बात पर है कि शेष प्रक्रियाएं कब तक पूरी होती हैं और ये स्वास्थ्य परियोजनाएं कब जमीन पर उतरकर जनता को राहत देती हैं।

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