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भोपाल के जेपी अस्पताल में 380 बच्चों की दिल जांच, 158 को सर्जरी की जरूरत

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Published On: 15 December 2025

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार को भोपाल के जयप्रकाश जिला चिकित्सालय में बच्चों के लिए विशेष हृदय रोग जांच शिविर लगाया गया। इस शिविर में भोपाल संभाग के आठ जिलों से लाए गए 380 बच्चों की निशुल्क इको जांच की गई। जांच के बाद 158 बच्चों में गंभीर हृदय रोग की पुष्टि हुई, जिन्हें आगे सर्जरी के लिए चिन्हित किया गया है।

शिविर में हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम ने बच्चों की गहन जांच की। यह आयोजन सत्य साइन सेवा संगठन राजकोट और अहमदाबाद के सहयोग से किया गया। शिविर के दौरान क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक डॉ. नीरा चौधरी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की उपसंचालक डॉ. निधि शर्मा और सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन मौजूद रहे।

मिशन संचालक ने लिया फीडबैक

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने शिविर स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने जांच के लिए आए बच्चों और उनके परिजनों से चर्चा कर इलाज और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चों में बीमारियों और जन्मजात समस्याओं की समय रहते पहचान करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

शिविर में लाए गए सभी बच्चों की पहले आरबीएस टीमों द्वारा प्राथमिक स्क्रीनिंग की जा चुकी थी। जिन बच्चों में हृदय रोग की आशंका पाई गई थी, उन्हें विशेष रूप से इको जांच के लिए चयनित किया गया। जांच में जिन बच्चों में हृदय से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं, उनका इलाज और सर्जरी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पूरी तरह निशुल्क की जाएगी।

2013 से चल रहा कार्यक्रम

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम वर्ष 2013 से संचालित किया जा रहा है। इसके तहत जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में चार प्रमुख समस्याओं बीमारी, कमी, विकास में देरी और जन्मजात दोष की पहचान और उपचार किया जाता है। मोबाइल आरबीएस टीम तय कार्यक्रम के अनुसार आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की जांच करती हैं।

नि:शुल्क सर्जरी की सुविधा

कार्यक्रम के अंतर्गत जन्मजात हृदय रोग, कॉक्लियर इंप्लांट, क्लब फूट, क्लेफ्ट लिप, क्लेफ्ट पैलेट और अन्य गंभीर बीमारियों की सर्जरी नि:शुल्क कराई जाती है। इसके लिए किसी प्रकार की आर्थिक पात्रता की शर्त नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे शिविरों से समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाती है, जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। शिविर में आए परिजनों ने बताया कि निजी अस्पतालों में महंगे इलाज की चिंता के बीच यह पहल उनके लिए बड़ी राहत है। शासन द्वारा दी जा रही निशुल्क जांच और सर्जरी की सुविधा से कई परिवारों को नया सहारा मिला है।

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