न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के विभाजन को लेकर नाराज तहसीलदार और नायब तहसीलदार सोमवार से काम पर लौट सकते हैं। इस संबंध में मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ आज प्रमुख सचिव राजस्व से मुलाकात करेगा और उसी के बाद निर्णय लिया जाएगा। काम बंद होने से अकेले भोपाल में ही 6 हजार से अधिक केस पेंडिंग हो गए हैं। इनमें ज्यादातर मामले आम जनता से जुड़े हैं। प्रतिदिन करीब 500 नामांतरण, सीमांकन, फौती, जाति-निवास प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस से जुड़े आवेदन आते हैं, जबकि 300 प्रकरणों की सुनवाई तहसीलदार-नायब तहसीलदार करते हैं। काम बंद के कारण दो दिन में ही 600 से अधिक केस टल गए।
दिए गए थे निर्देश
सरकार इस मुद्दे पर सख्त है। तीन दिन पहले ही सभी संभागायुक्तों को निर्देश दिए गए थे कि जो अधिकारी काम पर नहीं लौटते, उन्हें निलंबित किया जाए। भोपाल की बैरागढ़, कोलार, एमपी नगर, शहर वृत्त, बैरसिया और टीटी नगर तहसीलों में न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्य अलग-अलग कर दिए गए हैं। यानी, न्यायिक कार्य देखने वाले अधिकारी फील्ड में नहीं जाते और फील्ड वाले अधिकारी न्यायिक काम नहीं करते। इसी व्यवस्था का अधिकारी विरोध कर रहे हैं।
होगा निर्णय
संघ ने बताया था कि शुरुआत में यह सिस्टम केवल 12 जिलों में तीन महीने के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू होना था, लेकिन बाद में इसे 9 और जिलों में लागू कर दिया गया। इसी के चलते 6 अगस्त से काम बंद करने का फैसला लिया गया। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीनचंद्र कुंभकार ने कहा कि आज प्रमुख सचिव से मुलाकात के बाद ही काम पर लौटने का निर्णय होगा।
