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भोपाल के वार्ड-31 की जीत पर सवाल, जाति प्रमाण पत्र के घेरे में BJP पार्षद; प्रशासन सख्त

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Published On: 4 January 2026

भोपाल नगर निगम के वार्ड-31 से भाजपा पार्षद बृजला सचान की चुनावी जीत अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गई है। चुनाव के दौरान उपयोग किए गए उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर दर्ज शिकायत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए औपचारिक जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा ने पार्षद बृजला सचान को नोटिस जारी कर 23 जनवरी तक अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि तय तारीख और समय पर जवाब नहीं देने की स्थिति में एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने दोपहर 3 बजे स्वयं या अधिकृत अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

कोलार क्षेत्र के प्रियंका नगर निवासी शैलेष सेन द्वारा की गई शिकायत में दावा किया गया है कि पार्षद का जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा गया और जीत दर्ज की गई। इसी शिकायत के आधार पर एसडीएम कार्यालय ने जांच की औपचारिक शुरुआत की।

भोपाल महापौर की करीबी होने की चर्चा

राजनीतिक गलियारों में बृजला सचान को महापौर मालती राय की करीबी माना जाता है। नगर निगम के कई कार्यक्रमों में वे महापौर के साथ नजर आती रही हैं। यही वजह है कि यह मामला सामने आने के बाद निगम और भाजपा के अंदरूनी हलकों में भी खुसर-पुसर तेज हो गई है। पिछले नगर निगम चुनाव में बृजला सचान ने कांग्रेस प्रत्याशी राज सिंह को 1144 मतों के बड़े अंतर से हराया था। सचान को 2722 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी राज सिंह को 1578 मतों से संतोष करना पड़ा था। अब इस जीत की वैधता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

पहले भी भेजे जा चुके हैं नोटिस

सूत्रों के अनुसार, यह पहला नोटिस नहीं है। इससे पहले भी इस मामले में दो बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के चलते प्रशासन ने अब अंतिम चेतावनी की भाषा अपनाई है। जब इस पूरे मामले में पार्षद बृजला सचान से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने खुद को व्यस्त बताते हुए फिलहाल कोई विस्तृत जवाब देने से परहेज किया। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद मामले को लेकर और सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजनीति में बढ़ी हलचल

जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा यह विवाद अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। 23 जनवरी को होने वाली सुनवाई के बाद ही तय होगा कि यह मामला पार्षद के लिए महज जांच तक सीमित रहेगा या फिर उनकी राजनीतिक राह में बड़ा मोड़ साबित होगा।

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