मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में को दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर जोरदार चर्चा हुई। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रवि सक्सेना ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में करीब 35 लाख दिव्यांगजन लगातार उपेक्षा और अन्याय का शिकार हो रहे हैं। सरकार उन्हें उनका संवैधानिक हक और न्यूनतम सम्मान देने में असफल साबित हुई है।
दिव्यांगजनों की पेंशन
रवि सक्सेना ने सरकार की तुलना लाड़ली बहना योजना से करते हुए कहा कि जब महिलाओं को ₹1250 प्रतिमाह सम्मान निधि दी जा सकती है, तो दिव्यांगों को सिर्फ ₹600 पेंशन देकर उनका अपमान क्यों किया जा रहा है। उन्होंने इसे न सिर्फ दिव्यांग अधिकार अधिनियम (RPwD Act 2016) की धारा 24 का उल्लंघन बताया, बल्कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना भी करार दिया।
उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में हाई कोर्ट और 2017 में सुप्रीम कोर्ट (राजीव रतुरी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) दोनों ने साफ निर्देश दिए थे कि दिव्यांगजनों को योजनाओं में सामान्य लाभार्थियों से कम से कम 25% ज्यादा लाभ दिया जाना चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार ने इन आदेशों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
UDID कार्ड पर सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने दिव्यांग पहचान पत्र (UDID कार्ड) को लेकर सरकार की लापरवाही पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 35 लाख दिव्यांग हैं, लेकिन अब तक केवल 9.5 लाख को ही UDID कार्ड जारी किए गए हैं। इस गति से काम चला तो सभी दिव्यांगों को कार्ड मिलने में 21 साल लग जाएंगे। यानी आने वाले दशकों तक लाखों दिव्यांग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहेंगे।
दिव्यांग बच्चों का सर्वे तक नहीं
सक्सेना ने आगे कहा कि RPwD Act की धारा 17 में हर पांच साल में दिव्यांग बच्चों का सर्वे कराने का प्रावधान है, ताकि उनकी शिक्षा और रोजगार की जरूरतों का पता चल सके। लेकिन अब तक प्रदेश में एक भी सर्वे नहीं हुआ। इसका सीधा असर दिव्यांग बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार खुद को “समावेशी विकास” की समर्थक बताती है, जबकि हकीकत इसके उलट है।
कांग्रेस ने रखीं 6 मांग
- हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दिव्यांग पेंशन 600 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 1562 रुपये प्रतिमाह की जाए।
- सभी दिव्यांगों को तय समय सीमा में UDID कार्ड उपलब्ध कराए जाएं।
- दिव्यांगों के लिए आरक्षित सरकारी पदों पर त्वरित नियुक्ति walk in interview के जरिए की जाए।
- दिव्यांगों की गणना हर दो साल में अनिवार्य रूप से कराई जाए।
- सभी सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों में दिव्यांगजनों को कम से कम 25% अतिरिक्त लाभ दिया जाए।
- मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन दिव्यांग कल्याण के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ गठित किया जाए।
मजाक बना रही सरकार
रवि सक्सेना ने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ 600 रुपये की पेंशन देकर दिव्यांगजनों की गरिमा और अधिकारों का मजाक बना रही है। प्रदेश में हजारों दिव्यांगजन दो वक्त की रोटी, बच्चों की पढ़ाई और न्यूनतम सम्मान के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी यह अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगी और दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ाई लड़ेगी।
