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भोपाल में नेशनल लोक अदालत में बीमा क्षेत्र का सबसे बड़ा सेटलमेंट,  एक्सिस मैक्स लाइफ और परिवादी के बीच 1.79 करोड़ रुपए का समझौता

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Published On: 13 December 2025

भोपाल के जिला उपभोक्ता प्रतितोषण आयोग (क-1) में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में बीमा क्षेत्र से जुड़ा प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा सेटलमेंट हुआ। एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी और परिवादी पक्ष के बीच 1 करोड़ 79 लाख 20 हजार रुपए का फुल एंड फाइनल समझौता किया गया। आयोग ने आदेश दिया कि पांच दिन के भीतर यह राशि नॉमिनी प्रदीप कुमार के खाते में जमा कराई जाए।

सुनवाई और राजीनामा आवेदन

लोक अदालत में प्रकरण की सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से अधिवक्ता मोहन चौकसे और पंकज दनके मौजूद थे। उभयपक्ष की ओर से हस्ताक्षरित राजीनामा आवेदन पेश किया गया, जिसमें तीनों पॉलिसियों पर आपसी सहमति से समझौता होने की जानकारी दी गई। आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य डॉ. प्रतिभा पाण्डेय ने समझौते को स्वेच्छापूर्ण मानते हुए तीनों प्रकरणों को समाप्त करने का आदेश दिया।

बीमा क्लेम खारिज होने का कारण

राजेश कुमार ने अपने जीवनकाल में एक्सिस मैक्स लाइफ की तीन पॉलिसियां ली थीं, जिनकी कुल बीमित राशि लगभग 2 करोड़ 23 लाख रुपए थी। उनके निधन के बाद नॉमिनी प्रदीप कुमार ने क्लेम प्रस्तुत किया। कंपनी ने दावा खारिज कर दिया, यह कहकर कि पॉलिसी लेने के समय राजेश कुमार ने अपनी बीमारी की जानकारी छुपाई थी। इसके बाद परिवादी ने तीनों पॉलिसियों के लिए अलग-अलग शिकायतें जिला उपभोक्ता आयोग में दायर की।

लोक अदालत से त्वरित समाधान

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से समझौते का प्रस्ताव आया। लंबी कानूनी प्रक्रिया और देरी से बचने के लिए परिवादी पक्ष ने लोक अदालत के माध्यम से 1.79 करोड़ रुपए के सेटलमेंट को स्वीकार किया। समझौते के तहत यह राशि पूर्ण संतुष्टि के आधार पर भुगतान की जाएगी। परिवादी पक्ष के अधिवक्ता मोहन चौकसे और पंकज दनके ने बताया कि उनके 34 वर्षों के वकालती करियर में नेशनल लोक अदालत के जरिए बीमा क्लेम का इतना बड़ा सेटलमेंट पहली बार हुआ। उनके अनुसार, यह मध्यप्रदेश के लोक अदालत इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बीमा सेटलमेंट माना जा सकता है।

इस समझौते ने न केवल परिवादी को राहत दी, बल्कि लोक अदालत की त्वरित और प्रभावी कार्यप्रणाली को भी उजागर किया। ऐसे मामले यह साबित करते हैं कि नेशनल लोक अदालत लंबे समय तक लंबित रहने वाले बीमा और उपभोक्ता विवादों के लिए कारगर विकल्प साबित हो सकती है।

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