सतना जिले के कुछ नामी-गिरामी प्राइवेट स्कूल एक बार फिर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि इन स्कूलों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को भ्रम में रखकर जबलपुर के ब्लैकलिस्टेड किताब दुकानदारों को स्कूल की किताबों का ठेका दे दिया। यह पूरा मामला न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि नियमों की खुली अनदेखी की ओर भी इशारा करता है।
सूत्रों के अनुसार, जिले में निजी प्रकाशकों की किताबों के एजेंट पहले से ही सक्रिय हैं। इसी बीच जबलपुर में ब्लैकलिस्ट किए जा चुके दो दुकानदार कथित तौर पर चुपचाप सतना पहुंचे और जिले के कुछ बड़े स्कूलों से लाखों रुपये के सौदे तय कर लिए। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम की भनक जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन तक नहीं पहुंची।
नियमों को रखा गया ताक पर
शिक्षा अधिनियम के तहत किसी भी स्कूल को किताबों की बिक्री में अभिभावकों पर दबाव बनाने या प्रतिबंधित दुकानदारों से करार करने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद, आरोप है कि कुछ स्कूल संचालकों ने मोटे कमीशन के लालच में नियमों को दरकिनार कर दिया। इससे अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर मांग उठने लगी है कि ऐसे किताब एजेंटों को सतना जिले से भी ब्लैकलिस्ट किया जाए।
जिन निजी कंपनियों की किताबें इन अवैध सौदों के तहत स्कूलों में लगाई गई हैं, उन पर प्रतिबंध लगाने और संबंधित एजेंटों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की जरूरत बताई जा रही है। आरोपों के घेरे में आए स्कूलों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
पिछले साल भी हुआ था खुलासा
यह पहला मौका नहीं है जब सतना में निजी स्कूलों की किताबों को लेकर गड़बड़ी सामने आई हो। बीते वर्ष कलेक्टर ने निजी किताबों की अवैध बिक्री के मामले में 17 स्कूलों पर जुर्माना लगाया था। उस दौरान प्रशासन ने करीब 36 लाख रुपये की वसूली की थी। यह कार्रवाई जिले भर में चर्चा का विषय बनी थी। वहीं, जबलपुर में इसी तरह के मामलों में प्रशासन ने और भी सख्त रुख अपनाया था। वहां जुर्माने के साथ-साथ दोषी स्कूल संचालकों और दुकानदारों को जेल तक भेजा गया था। यही वजह है कि जबलपुर में ब्लैकलिस्ट किए गए दुकानदारों का नाम सामने आते ही सतना में भी सवाल उठने लगे हैं।
फिर वही पुराने तरीके
आरोप है कि सतना के कुछ बड़े स्कूल संचालक अपनी पुरानी कार्यशैली से बाज नहीं आ रहे हैं। गोपनीय तरीके से बाहरी जिलों के दुकानदारों से सौदे कर अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। यह पूरा मामला शिक्षा को व्यापार बनाने की सोच को उजागर करता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस कथित किताब कांड पर सतना कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। क्या शिक्षा अधिनियम के उल्लंघन पर दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
सूत्रों का दावा है कि जिन स्कूलों ने इस तरह का खेल किया है, उनके नाम जल्द ही सार्वजनिक हो सकते हैं। ऐसे में अभिभावकों और आम जनता की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
