MP में दिवाली की रौनक के बीच कई परिवारों की खुशियां हादसों और आग के चलते फीकी पड़ गईं। राज्यभर में बीते दो दिनों में 41 बर्न केस दर्ज किए गए। इनमें से अधिकांश मामले बच्चों और युवाओं के थे, जो बिना निगरानी के पटाखे जला रहे थे।
एम्बुलेंस सेवा 108 की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अक्टूबर को प्रदेशभर से 13 बर्न केस दर्ज हुए थे। इनमें तीन केस देवास जिले से सामने आए। लेकिन 20 अक्टूबर यानी दिवाली के दिन यह संख्या बढ़कर 28 हो गई। विदिशा में चार, रीवा में तीन और अन्य जिलों में बचे केस दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और युवाओं की लापरवाही, आग से सुरक्षित दूरी न बनाए रखना और अनजाने में तेज पटाखों का इस्तेमाल, इन हादसों की बड़ी वजह रही।
सड़क हादसों ने बढ़ाई चिंता
बर्न केस के अलावा सड़क हादसों ने भी त्योहार में लोगों की खुशियों को कम कर दिया। दो दिनों में राज्यभर में कुल 1032 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा झाबुआ जिले में हुए, जहां कुल 67 एक्सीडेंट केस रिपोर्ट हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये दुर्घटनाएं मुख्य रूप से ओवरस्पीडिंग, नशे में वाहन चलाने और रात्रिकालीन भीड़भाड़ के कारण हुईं। दिवाली के दिन लोग घर और बाजार में ज्यादा निकलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
दी चेतावनी
विशेषज्ञों ने आग और सड़क हादसों को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि त्योहार के समय सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। बच्चों को पटाखे जलाने से पहले माता-पिता की देखरेख में रखना चाहिए और सड़क पर वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। 108 की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि त्योहार में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है।
अस्पतालों में इलाज
इन हादसों के चलते अस्पतालों में भी भीड़ बढ़ गई। बर्न केस और सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों का इलाज तत्काल शुरू किया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि समय पर प्राथमिक उपचार और एम्बुलेंस सेवा 108 की सहायता ने कई जख्मी लोगों की जान बचाई।
