देश भर में शिक्षा सुधार के नारे गूंज रहे हैं, लेकिन सीधी जिले के सेमरिया टोला सरकारी प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है। यहां “शिक्षा” नहीं, बल्कि लापरवाही और मनमानी का पाठ पढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत पर जब एक स्थानीय मीडियाकर्मी स्कूल पहुंचा, तो वहां का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया।
शिक्षिका मोबाइल में मग्न
विद्यालय परिसर में केवल एक वृद्ध ग्रामीण महिला और एक शिक्षिका मौजूद थीं। शिक्षिका बच्चों को पढ़ाने के बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त थीं। स्कूल में न तो कोई शिक्षण गतिविधि चल रही थी और न ही बच्चों के चेहरे दिखाई दे रहे थे बस दो-तीन बच्चे ही उपस्थित थे।
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह था कि मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) कई महीनों से बंद पड़ा था। बच्चों को न खाना मिल रहा है, न शिक्षा और विभागीय अधिकारी इस लापरवाही से अनजान बने हुए हैं।
कैमरे में कैद हुआ सच्चाई
मीडियाकर्मी ने जब यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड किया, तो शिक्षिका ने अपना आपा खो दिया। वीडियो बनते देख उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और रिपोर्टर को धमकाने लगीं। शिक्षिका ने मीडिया कर्मी पर अभद्रता के झूठे आरोप लगाते हुए सीधे थाने जा पहुंचीं। अब खबर है कि वीडियो डिलीट करवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और पुलिस तक का इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।
वायरल हुआ वीडियो
घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। ग्रामीणों और अभिभावकों में गुस्सा और आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर बच्चों का भविष्य किसके भरोसे छोड़ा गया है? शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जांच नहीं हुई है, जबकि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ही शिक्षा सुधार पर जोर देने की बात करते रहे हैं।
सवालों के घेरे में प्रशासन
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब स्कूल में ऐसी लापरवाही देखी गई है। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों की मांग है कि इस स्कूल की जांच टीम गठित कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
