भोपाल | संभागायुक्त संजीव सिंह ने आयोजित समय-सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक में स्कूलों में बच्चों के नेत्र परीक्षण को प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग आपसी समन्वय बनाकर इस काम को पूरा करें, ताकि बच्चों को समय पर जांच, जरूरत पड़ने पर चश्मा और आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में उपायुक्त (राजस्व) किरण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त (विकास) विनोद यादव और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। संभागायुक्त ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का निराकरण तेजी से किया जाए। खासकर 100 दिनों से अधिक लंबित शिकायतों को तत्काल निपटाने के लिए विभागों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए।
योजनाओं पर सख्ती
संभागायुक्त सिंह ने समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए कहा कि शिकायतों का संतोषजनक निपटारा किया जाना जरूरी है, ताकि आमजन को शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की लंबित शिकायतों पर विशेष ध्यान देने की बात भी उन्होंने कही।
इसके साथ ही जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना को भी प्राथमिकता से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। नगरीय प्रशासन विभाग को आवासों की जियो टैगिंग के बाद शीघ्र परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा गया।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर फोकस
संभागायुक्त ने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग और महिला-बाल विकास विभाग की संयुक्त बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों से ही इस दिशा में सुधार संभव है। बैठक में ई-ऑफिस प्रणाली को सभी विभागों में लागू करने पर भी जोर दिया गया। सिंह ने कहा कि यह व्यवस्था न केवल कार्यप्रणाली को तेज बनाएगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगी।
संभागायुक्त के निर्देशों से साफ है कि प्रशासन अब शिकायतों और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अधिक गंभीर है। यदि विभाग समय पर इन कार्यों को अमल में लाते हैं, तो जनता को बड़ी राहत मिल सकती है।
