भोपाल | MP में प्राइवेट स्कूल संचालकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सरकार द्वारा लागू किए गए नए मान्यता नियमों को लेकर सैकड़ों स्कूल बंद होने की कगार पर हैं, जबकि हजारों शिक्षक और लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि अब स्कूलों को नियमों का पालन करना ही होगा, वरना उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत में मंत्री सिंह ने कहा, “पहले कहा जाता था कि शिक्षा विभाग ध्यान नहीं देता। अब जब हमने नियम लागू किए हैं, तो उनका पालन हर हाल में करना होगा। अगर कोई स्कूल शैक्षणिक, भौतिक या सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसे चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह मोहन यादव की सरकार है, यहां अव्यवस्था को मंजूरी नहीं दी जाएगी।”
एक साल की सशर्त राहत
शिक्षा मंत्री ने बताया कि कई स्कूल न्यूनतम मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इन स्कूलों को बच्चों के हित में एक साल की सशर्त मान्यता दी गई है, ताकि वे तय मापदंड पूरे कर सकें। लेकिन यदि एक साल के भीतर आवश्यक सुधार नहीं हुए, तो अगले शैक्षणिक सत्र में इनकी मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि किसी छात्र की पढ़ाई नहीं रुकेगी। यदि कोई स्कूल बंद होता है, तो छात्रों को पास के सरकारी स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत पढ़ने वाले बच्चों के हितों की रक्षा की जाएगी।
संचालकों का संघर्ष
नए नियमों के विरोध में प्राइवेट स्कूल संचालक मंच मई से सड़कों पर है। हाल ही में उन्होंने शिक्षा मंत्री के 74 बंगला स्थित आवास के बाहर प्रदर्शन किया। मंच के अध्यक्ष शैलेष तिवारी ने कहा कि नियम इतने अव्यावहारिक हैं कि प्रदेश के 4,820 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया। इससे करीब 70 हजार शिक्षक बेरोजगार हो सकते हैं और आरटीई के तहत पढ़ने वाले डेढ़ लाख बच्चों की पढ़ाई खतरे में आ जाएगी। सरकार और संचालकों के बीच फिलहाल कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
