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CM यादव करेंगे विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और मोबाइल ऐप का लोकार्पण, जानें खासियत

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Published On: 1 September 2025

भोपाल | भारतीय कालगणना और वैदिक परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल अब जनता तक पहुंचने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार 1 सितंबर को सीएम आवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और उसके मोबाइल ऐप का लोकार्पण किया। यह अनोखी घड़ी सिर्फ समय ही नहीं बताएगी, बल्कि भारतीय पंचांग, नक्षत्र, तिथि, योग, वार, मास और त्योहारों की पूरी जानकारी भी देगी।

“भारत का समय, पृथ्वी का समय”

कार्यक्रम से पहले राजधानी भोपाल में युवाओं का एक बड़ा मार्च निकला। सुबह 9 बजे शौर्य स्मारक से कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी एकत्रित हुए। वहां से बाइक और बस रैली के रूप में यात्रा शुरू हुई, जो श्यामला हिल्स थाने तक गई। इसके बाद रैली पैदल मार्च में बदलकर मुख्यमंत्री निवास पहुंची। इस दौरान भारत का समय-पृथ्वी का समय थीम पर युवा मुख्यमंत्री से सीधा संवाद किया।

विश्व की पहली वैदिक घड़ी

मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि यह घड़ी भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ 29 फरवरी 2024 को उज्जैन में किया था। इसके बाद से इसे देश-विदेश में सराहना मिल रही है। यह घड़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अद्भुत संगम है। घड़ी की खासियत यह है कि इसमें भारतीय समय पद्धति को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। लोग इसे 189 से अधिक भाषाओं में देख सकेंगे।

7000 वर्षों का पंचांग

इस घड़ी का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है, जिसमें हजारों वर्षों का वैदिक कैलेंडर समाहित है। इसमें 3179 विक्रम पूर्व (श्रीकृष्ण जन्मकाल) और महाभारतकाल से लेकर आज तक का विवरण उपलब्ध है। ऐप में 7000 वर्षों से अधिक की पंचांग संबंधी जानकारियाँ, नक्षत्र, योग, करण, वार, व्रत, त्योहारों और शुभाशुभ मुहूर्तों की जानकारी दी गई है। धार्मिक और वैदिक कार्यों के लिए इसमें 30 प्रकार के विशेष मुहूर्तों की जानकारी भी होगी। साथ ही अलार्म की सुविधा से लोग अपने व्रत या साधना के समय को सेट कर पाएंगे।

आधुनिक सुविधाओं से लैस

  • वैदिक समय (30 घंटे के हिसाब से गणना)
  • वर्तमान मुहूर्त स्थान
  • जीएमटी और आईएसटी का समय
  • सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना
  • मौसम की जानकारी (तापमान, आर्द्रता, हवा की गति)
  • हर दिन के 30 अलग-अलग मुहूर्तों का सटीक विवरण भी इसमें देखने को मिलेगा।

भारत की सांस्कृतिक धुरी बनेगी

इस घड़ी और ऐप के जरिए भारत अपनी प्राचीन कालगणना पद्धति को फिर से जीवित कर रहा है। तिवारी ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से प्रकृति और विज्ञान का अद्भुत संतुलन रही है। यही परंपरा दुनिया को जीवन जीने का मार्ग दिखाती रही है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी न सिर्फ समय बताएगी, बल्कि यह भारत की धरोहर, परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टि का गौरवपूर्ण प्रतीक भी बनेगी। यह दुनिया की विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने वाली कड़ी साबित होगी।

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