राजधानी में भोपाल-इंदौर बाईपास (बिलखिरिया/सूखी सेवनिया) पर सोमवार को सड़क धंसने की घटना ने शहर में हड़कंप मचा दिया। 305 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क का लगभग 100 मीटर लंबा हिस्सा धंसकर 20-30 फीट गहरा खतरनाक गड्ढा बन गया। सौभाग्य से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन यह हादसा सिर्फ संयोग था।
इसी सिलसिले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सड़क के नीचे पानी भरने की समस्या वर्षों से ज्ञात थी, लेकिन ग्रामीणों की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
साल 2013 में बनी सड़क का मेंटेनेंस अनुबंध 2020 में रद्द हो गया, उसके बाद भी निगरानी का नामोनिशान नहीं है। पटवारी ने कहा, “एमपीआरडीसी सालाना मरम्मत का दावा करती है, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं। यह सब ‘50% कमीशन वाली सरकार’ की नाकामी का प्रतीक है।”
सड़क हादसों की गंभीर स्थिति
भोपाल में पिछले आठ महीनों में सड़क हादसों में 162 लोग मारे गए और 1473 घायल हुए। पीटीआरआई के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में 13,798 और 2024 में 14,791 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई। खराब सड़कें, गड्ढे और घटिया निर्माण इन हादसों का मुख्य कारण हैं। पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार की लापरवाही ने मध्य प्रदेश को देश का दूसरा सबसे असुरक्षित राज्य बना दिया है।
देखिए, 50% कमीशन की सरकार का एक और उदाहरण! pic.twitter.com/RyhccnweEe
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) October 13, 2025
कांग्रेस की मांगें
- एमपी नगर (जुलाई 2025) और बिलखिरिया (अक्टूबर 2025) की घटनाओं की उच्च स्तरीय न्यायिक या सीबीआई जांच।
- गुणवत्ता, भ्रष्टाचार और जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों सहित जांच समिति।
- पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का इस्तीफा, उनकी लापरवाही और असंवेदनशील बयानों के लिए जवाबदेही तय की जाए।
- प्रभावित सड़कों की मरम्मत 15 दिनों में पूरी की जाए और राज्यव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान चलाया जाए।
पटवारी ने चेतावनी दी कि अगर भाजपा सरकार इन मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो कांग्रेस जनता के साथ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगी।
संकट पर ध्यान देने की जरूरत
पटवारी ने कहा, “भोपाल-इंदौर बाईपास सड़क हादसा सिर्फ संयोग से टला। जनता की जान जोखिम में है। सरकार को अब जागना होगा, नहीं तो कांग्रेस हर हाल में कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।” भोपाल की सड़कें न केवल शहरवासियों के लिए खतरा बन गई हैं, बल्कि यह भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण भी बन चुकी हैं।
