भोपाल में गोमांस मिलने और गंदे पानी की सप्लाई को लेकर चल रहे विवाद ने सोमवार को बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आईएसबीटी स्थित नगर निगम कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान महापौर मालती राय और एमआईसी का रावण रूपी पुतला जलाया गया, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
प्रदर्शनकारी निगम दफ्तर तक मार्च करते हुए पहुंचे, जहां पहले से मौजूद पुलिस बल के साथ उनकी धक्का-मुक्की भी हुई। कांग्रेस कार्यकर्ता महापौर का 11 सिर वाला कटआउट लेकर पहुंचे थे, जिसमें 10 सिर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के दर्शाए गए थे। प्रदर्शन के दौरान नगर निगम प्रशासन के खिलाफ तीखे नारे लगाए गए।
कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन
कांग्रेस नेताओं ने इंदौर में दूषित पानी पीने से 33 लोगों की मौत का हवाला देते हुए कहा कि भोपाल में भी हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। कई इलाकों में पानी की लाइनें सीवेज लाइनों के साथ बिछी हुई हैं, जिससे घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है। नेताओं का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भोपाल भी बड़े हादसे की ओर बढ़ सकता है।
जल सुनवाई पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि वार्ड कार्यालयों में होने वाली जल सुनवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नाले के पानी को भी पीने योग्य बताकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। हाल ही में हुई एक मीडिया जांच में वार्ड कर्मचारी द्वारा नाली के पानी को पीने योग्य बताए जाने का मामला सामने आया था।
कांग्रेस नेता रविंद्र साहू ने कहा कि कई क्षेत्रों में पानी के चैंबर में सीवेज का पानी मिल रहा है, जबकि कई जगह सीधे गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। इसके चलते लोग बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
मामला भी उठाया
प्रदर्शन के दौरान स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मामले को भी प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि अब तक केवल छोटे कर्मचारियों पर ही कार्रवाई हुई है, जबकि असली जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है। नेताओं ने कहा कि स्लॉटर हाउस से जुड़े फैसले एमआईसी की बैठक में लिए गए थे, फिर भी महापौर और एमआईसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के बाद भी निगम प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
