MP सरकार ने युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के नए अवसर देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने फैसला किया है कि अब राज्य के 17 विश्वविद्यालयों में देश की प्रमुख भाषाओं के कोर्स शुरू किए जाएंगे। इन कोर्सेस के जरिए छात्रों को अलग-अलग भाषाओं का ज्ञान मिलेगा, जो आगे चलकर उनकी पढ़ाई और करियर दोनों में मददगार साबित होगा।
विभाग का बड़ा फैसला
उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि अलग-अलग भाषाएं सीखना सिर्फ ज्ञान बढ़ाने का जरिया ही नहीं है, बल्कि यह छात्रों के व्यक्तित्व और सोचने के तरीके को भी नया आयाम देता है। देश के अलग-अलग हिस्सों की प्रमुख भाषाएं जानने से न केवल रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने का भी अवसर मिलेगा।
हालांकि अभी सभी भाषाओं की सूची आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई है, लेकिन बताया जा रहा है कि हिंदी, संस्कृत, मराठी, गुजराती, बंगाली, पंजाबी, उड़िया, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम जैसी भाषाओं के कोर्स इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अंग्रेजी और उर्दू जैसी पहले से पढ़ाई जाने वाली भाषाओं को भी ज्यादा उन्नत तरीके से सिखाने की योजना है।
छात्रों को फायदा
इन नए कोर्सेस से छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में फायदा मिलेगा। साथ ही, जिन छात्रों को रिसर्च, अनुवाद, साहित्य या पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में करियर बनाना है, उनके लिए ये कोर्स बहुत उपयोगी साबित होंगे। खास बात यह है कि दूसरी भाषाएं सीखने से छात्रों के लिए दूसरे राज्यों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अवसर बढ़ेंगे।
सरकार की योजना
उच्च शिक्षा विभाग ने यह भी तय किया है कि इन कोर्सेस को लचीला बनाया जाएगा। मतलब यह कि छात्रों को डिग्री प्रोग्राम के साथ-साथ डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स करने का विकल्प भी मिलेगा। इससे वे अपनी जरूरत और रुचि के हिसाब से भाषा का चुनाव कर सकेंगे।
इस फैसले का एक और फायदा यह होगा कि अलग-अलग भाषाओं के जरिए प्रदेश के छात्र भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकेंगे। इससे न केवल शिक्षा का स्तर बेहतर होगा, बल्कि देश की एकता और भाईचारे की भावना भी मजबूत होगी।
