भोपाल में लव जिहाद, ड्रग्स और तालाब-जमीनों पर कब्जे जैसे गंभीर आरोपों से घिरे मछली परिवार पर शिकंजा कसता जा रहा है। मामला तब और गर्म हो गया जब दो दिन पहले जैनेंद्र पाठक, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो के दिल्ली स्थित घर पहुंच गए और परिवार के लिए मदद की गुहार लगाने लगे। लेकिन कानूनगो ने सख्ती दिखाई तो जैनेंद्र मिठाई का डिब्बा छोड़कर वहां से भाग खड़े हुए।
कानूनगो पहुंचे भोपाल
घटनाक्रम के बाद कानूनगो भोपाल पहुंचे और मीडिया से खुलकर बातचीत की। कांग्रेस नेता कमलेश्वर पटेल ने मछली परिवार को बचाने की कोशिश करने वालों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थीं और आरोप लगाया था कि जैनेंद्र, बीजेपी विधायक का भतीजा है। इस पर कानूनगो ने कहा, “कमलेश्वर जी क्या बोल रहे हैं, मुझे नहीं पता। इतना सुना है कि जैनेंद्र के पिता राजेंद्र पाठक, कमलेश्वर पटेल के पिता के नजदीकी सहयोगी थे। पुरानी पीढ़ी के लोगों पर टिप्पणी करना सही नहीं, लेकिन ये रिश्ता जरूर सबके सामने आना चाहिए।”
कानूनगो ने साफ कहा कि असली हिमाकत यह नहीं है कि कोई उनके घर मदद मांगने आया। असली हिमाकत यह है कि भोपाल में हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर उनका यौन उत्पीड़न किया गया, उनके वीडियो बनाए गए और ब्लैकमेल करके धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया।
मछली माफिया मध्यप्रदेश 📌
प्रदेश के सीहोर ज़िले के आष्टा में मछली सिंडिकेट के अतीक बारी नाम के एक मुस्लिम ठेकेदार द्वारा सरकारी सहकारिता विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर वंचित तबके के गरीब हिंदू मछुआरों के मत्स्य पालन के अधिकार को छीन कर सरकार के तालाब पर मत्स्याखेट हेतु अवैध…
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) September 6, 2025
उन्होंने माना कि जांच में अभी देरी इसलिए हो रही है क्योंकि पहली टीम की रिपोर्ट में कमियां पाई गई थीं। इसलिए NHRC ने दूसरी टीम को चार दिन के लिए भोपाल भेजा था, जिसने कई बयान दर्ज किए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही बड़ी कार्रवाई होगी। इसी बीच कानूनगो ने मछली परिवार से जुड़े एक और बड़े खुलासे की तरफ इशारा किया।
उन्होंने बताया कि शाहिद नाम का एक सदस्य रिनाउंड शूटर के दर्जे पर है और इस वजह से उसे 30 हजार कारतूस खरीदने का अधिकार है। उसके पास तीन हथियार होने की जानकारी मिली है, जिनमें 12 बोर की शॉटगन, 1 इंपोर्टेड रिवॉल्वर और 30.6 कैलिबर की राइफल शामिल है। कानूनगो ने सवाल उठाया कि आखिर एक ही व्यक्ति अलग-अलग बोर के हथियारों में शूटर कैसे हो सकता है?
सख्त कार्रवाई का संकेत
उन्होंने कहा कि यह जांचना जरूरी है कि शाहिद ने वाकई राज्य या देश के लिए कोई उपलब्धि हासिल की है या नहीं। 30 हजार कारतूस का मतलब है रोजाना 80-100 कारतूस चलाने का अधिकार। यह कोई मजाक नहीं है। इसकी मेडिकल जांच भी होनी चाहिए।तालाबों और जमीनों पर कब्जे के मामले में भी उन्होंने संकेत दिए कि रिपोर्ट आते ही सख्त कार्रवाई होगी। कुल मिलाकर NHRC की पैनी नजर अब सीधे मछली परिवार पर टिक चुकी है।
