बुधवार को सतना के नागौद नगर में उस समय हड़कंप मच गया जब जिला मुख्यालय से दवा दुकानों और क्लीनिकों की जांच टीम पहुंची। खबर मिलते ही अधिकांश डॉक्टर अपनी क्लीनिकें बंद कर भाग निकले, तो वहीं मेडिकल दुकानों के शटर दिनभर गिरे रहे। करीब 90 फीसदी प्राइवेट क्लीनिक बंद पाए गए। 40 मेडिकल स्टोर्स में से सिर्फ 7 दुकानें ही खुली मिलीं, जहां जांच टीम ने दस्तावेज़ खंगाले। फार्मासिस्ट की उपस्थिति ठीक पाई गई, लेकिन सभी को चेतावनी दी गई कि बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा बिक्री पाए जाने पर दुकान सील की जाएगी।
जांच में रवि मेडिकल, नारायणी मेडिकल, साईं मेडिकल, सुशील अग्रवाल मेडिकल, गोविंद मेडिकल, अग्रवाल मेडिकल और रजत गिरी मेडिकल ही खुले पाए गए। ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका चतुर्वेदी ने दुकानदारों से लाइसेंस और फार्मासिस्ट की जानकारी ली।
बस स्टैंड की दुकान बंद कराई
बस स्टैंड इलाके की एक मेडिकल दुकान पर फार्मासिस्ट नहीं मिला। टीम ने मौके पर ही दुकान को बंद करा दिया और संचालक को कारण बताओ नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की। जिन क्लीनिक और मेडिकल दुकानों की जांच नहीं हो पाई है, उन्हें अगले चरण में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि अब हर दुकान और क्लीनिक की नियमित जांच की जाएगी ताकि फर्जी प्रैक्टिस और गैरकानूनी दवा बिक्री पर लगाम लग सके।
सिरप कांड के बाद बढ़ी सख्ती
छिंदवाड़ा में हुए सिरप कांड के बाद पूरे प्रदेश में मेडिकल स्टोर्स पर सख्ती शुरू की गई है। नागौद में यह कार्रवाई उसी अभियान का हिस्सा है। युवक कांग्रेस ने हाल ही में एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर फर्जी डॉक्टरों और गैरलाइसेंसी मेडिकल दुकानों को बंद करने की मांग की थी।
