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सिवनी पेंच टाइगर रिजर्व में रोमांचक नजारा, जुगनी बाघिन 4 शावकों संग दिखी; पर्यटक हुए रोमांचित

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Published On: 4 February 2026

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी पर निकले पर्यटकों को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो जीवनभर याद रहने वाला है। सफारी के दौरान जुगनी नाम की बाघिन अपने चार शावकों के साथ बेखौफ अंदाज में जंगल में चहलकदमी करती नजर आई। इस पूरे दृश्य का वीडियो भी सामने आया है, जो तेजी से चर्चा में है।

जानकारी के अनुसार, पर्यटकों की जिप्सी जब एक वन मार्ग से गुजर रही थी, तभी सामने से जुगनी बाघिन अपने चार शावकों के साथ कच्ची सड़क पार करती हुई जंगल की ओर बढ़ती दिखाई दी। बाघिन पूरी तरह निश्चिंत थी, जबकि शावक मां के आसपास खेलते और इधर-उधर दौड़ते नजर आए। इस नजारे को देखकर जिप्सी में बैठे पर्यटकों की खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था।

सिवनी: पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव

देश और विदेश से आने वाले पर्यटक पेंच नेशनल पार्क में खासतौर पर बाघों के दीदार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में एक साथ बाघिन और चार शावकों का दिखना बेहद दुर्लभ माना जाता है। पर्यटकों ने इस पल को कैमरे में कैद किया और इसे अपने सफारी अनुभव का सबसे खास क्षण बताया। पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में फैला हुआ है, जबकि इसका एक हिस्सा महाराष्ट्र के नागपुर जिले तक जाता है। पेंच नदी के नाम पर बने इस उद्यान को वर्ष 1975 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला था। बाद में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया, जिससे यहां बाघ संरक्षण को नई दिशा मिली।

‘द जंगल बुक’ से जुड़ा जंगल

पेंच टाइगर रिजर्व को विश्वप्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग की रचना “द जंगल बुक” से प्रेरित जंगल भी माना जाता है। घने जंगल, हरे-भरे घास के मैदान और पहाड़ियां इसकी पहचान हैं। यहां बाघ और तेंदुए के साथ-साथ भालू, जंगली कुत्ता, चीतल, सांभर, नीलगाय और गौर जैसे कई वन्यजीव पाए जाते हैं।

यह पार्क केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षी प्रेमियों के लिए भी खास है। यहां 250 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जो इसे जैव विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध बनाती हैं।

पर्यटन और संरक्षण का संतुलन

पेंच टाइगर रिजर्व में जीप सफारी और हाथी सफारी के जरिए पर्यटकों को जंगल भ्रमण की सुविधा मिलती है। अक्टूबर से जून तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह रिजर्व न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

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