शाजापुर के गिरवर इलाके में दरगाह रोड स्थित एक साधारण से दिखने वाले मकान में गुरुवार दोपहर बड़ा खुलासा हुआ। उज्जैन जोन की राज्य साइबर सेल टीम ने यहां छापा मारकर ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया, जो शेयर ट्रेडिंग एडवाइजरी के नाम पर लोगों से लाखों की ठगी कर रहा था। टीम को कई दिनों से इस गिरोह की गतिविधियों पर तकनीकी आधार पर सुराग मिल रहे थे।
दबिश के दौरान यहां से कुल 19 लोगों को पकड़ा गया, जिनमें 6 युवक और 13 युवतियां शामिल हैं। इनमें साहिल मंसूरी और फहीम गौरी को इस पूरे संचालन का मुख्य जिम्मेदार बताया जा रहा है। मकान से पुलिस ने कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रिंटर और दस्तावेज भी जब्त किए, जिनके जरिए गिरोह लोगों को झांसा देता था।
ऐसे की गई कार्रवाई
साइबर सेल को पहले से मिले कैमरा ट्रैप लोकेशन, बैंक खातों की गतिविधि और संदिग्ध मोबाइल नंबरों के आधार पर यह पूरी कार्रवाई की गई। लुभावने ऑफर देकर फर्जी डीमेट अकाउंट खुलवाते थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खुद को ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताकर लोगों को अधिक मुनाफा दिलाने का दावा करता था। फोन पर मीठी-मीठी बातें कर पहले फर्जी डीमेट अकाउंट खुलवाते, फिर एक एप डाउनलोड करवाया जाता था। शुरुआत में छोटे-छोटे मुनाफे दिखाकर भरोसा जीता जाता और रकम बढ़ते ही आईडी ब्लॉक कर दी जाती थी। गिरोह के सदस्य कॉल स्क्रिप्ट के मुताबिक बात करते थे ताकि पीड़ित को विश्वास हो जाए कि वह किसी असली कंपनी से बात कर रहा है।
इस उम्र की लड़कियां कर रही थी काम
छापे के दौरान हैरानी की बात यह भी सामने आई कि यहां काम करने वाली ज्यादातर युवतियां कम उम्र की हैं और 5 से 8 हजार रुपए के मामूली वेतन पर काम करती थीं। उन्हें पूरा सिस्टम समझाकर सिर्फ फोन कॉल करने के लिए रखा गया था। इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को जाल में फंसाकर पैसा ऐंठना था।
आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल फूटप्रिंट की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह के तार प्रदेश या देश के अन्य शहरों से जुड़े हैं या नहीं। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर और बड़े खुलासे संभव हैं- लीना मारोठ, डीएसपी
