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कृषक कल्याण वर्ष 2026, झाबुआ और टीकमगढ़ में कृषि रथ से किसानों तक पहुंची आधुनिक खेती की जानकारी

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Published On: 5 February 2026

कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से झाबुआ जिले के छह विकासखंडों में कृषि रथ के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में कृषि विशेषज्ञों के साथ कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी प्रतिदिन तीन ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर रहे हैं। अब तक 296 ग्राम पंचायतों में पहुंचकर करीब 20,250 किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया जा चुका है। इस दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के साथ-साथ उन्हें नवीन और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।

अधिकारियों द्वारा उन किसानों को विशेष रूप से मार्गदर्शन दिया जा रहा है जिनके पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा है। ऐसे किसानों को जायद मौसम में तिलहनी फसलों की बुवाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही कृषि रथ के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया जा रहा है और कार्ड में दी गई सिफारिशों के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी जा रही है, ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहे।

कृषक कल्याण वर्ष 2026

किसानों को प्राकृतिक खेती, नरवाई प्रबंधन और फसल बीमा योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उर्वरक वितरण की नई ई-टोकन प्रणाली के बारे में भी बताया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को उनके रकबे के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। अब खाद लेने के लिए लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर उर्वरक उपलब्धता की सूचना सीधे मिलेगी।

कृषि विशेषज्ञों द्वारा जायद मौसम की फसलों के साथ-साथ ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों की उपयोगिता भी समझाई जा रही है। इसके अलावा उद्यानिकी फसलों, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की जानकारी देकर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

टीकमगढ़ में भी कृषि रथ का प्रभाव

टीकमगढ़ जिले के सभी विकासखंडों में भी एक माह तक कृषि रथ चलाए जा रहे हैं। ग्राम मानिकपुरा में किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती के लाभ, नरवाई न जलाने और मृदा परीक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। कृषि रथ के माध्यम से ई-टोकन, ई-विकास पोर्टल और कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की योजनाओं की जानकारी दी गई। इस अभियान में कृषि वैज्ञानिकों, नोडल अधिकारियों और मैदानी अमले की सक्रिय भागीदारी रही।

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