सतना-मैहर मार्ग पर स्थित इचौल टोल प्लाजा पर हाल ही में फास्टैग सिस्टम के ठप होने और नगद वसूली के कारण वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ गई है। कई महीनों से टोल पर फास्टैग के बजाय नकद भुगतान की व्यवस्था लागू होने से लोगों में नाराजगी है। वाहन मालिकों का आरोप है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता पर सवाल उठाती है और टोल में अनियमितताओं की आशंका पैदा करती है।
भुगतान का दबाव
स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि उनके वाहनों में फास्टैग सक्रिय होने के बावजूद उन्हें नकद भुगतान के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि अतिरिक्त पैसे खर्च करने की नौबत भी आ रही है। कई लोगों ने बताया कि टोल पर अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे यात्रा में विलंब होता है और उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।
पारदर्शिता पर सवाल
वाहन मालिकों का मानना है कि टोल संचालन में नगद वसूली पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि फास्टैग प्रणाली को पुनः सक्रिय किया जाए और नकद वसूली की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए। लोगों का कहना है कि डिजिटल और स्वचालित टोल प्रणाली से चोरी और अनियमितता की संभावना कम होती है, जबकि नकद वसूली से ऐसे मामलों में इजाफा हो सकता है।
कार्रवाई की अपील
स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि टोल संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि फास्टैग सिस्टम को शीघ्र बहाल नहीं किया गया, तो टोल पर लंबित समस्याओं को लेकर व्यापक आंदोलन या विरोध प्रदर्शन होने की संभावना है।
फास्टैग की बचत
विशेषज्ञों का कहना है कि फास्टैग प्रणाली न केवल वाहन मालिकों का समय बचाती है बल्कि टोल संचालन की लागत और जटिलताओं को भी कम करती है। डिजिटल भुगतान से टोल प्लाजा पर मानवीय त्रुटियों और गलत वसूली की संभावना न्यूनतम रहती है।
