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दमोह में पैर धुलाई विवाद से मचा बवाल, सियासत गरमाई; समाजों में बढ़ा तनाव

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Published On: 21 October 2025

दमोह जिले में पिछले एक हफ्ते से पैर धुलाई विवाद ने माहौल गरमा दिया है। एक AI जनरेटेड वीडियो से शुरू हुआ मामला अब राजनीति और समाज दोनों में बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है। कुशवाहा समाज के युवक द्वारा एक वीडियो शेयर करने के बाद जो घटनाक्रम हुआ, उसने पूरे इलाके को हिला दिया। दमोह के सतरिया गांव में कुछ दिन पहले गांव के अनुज पांडे को शराब बेचते और पीते पकड़ा गया था। इसके बाद गांव के ही एक युवक ने उसका एआई जनरेटेड वीडियो शेयर कर दिया, जिसमें अनुज को जूते की माला पहने दिखाया गया था। वीडियो वायरल होते ही गांव के कुछ लोग नाराज हो गए। युवक ने वीडियो डिलीट कर माफी मांगी, लेकिन बात नहीं बनी।

10 अक्टूबर को पंचायत बैठी और फैसला सुनाया गया कि युवक को अनुज पांडे के पैर धोकर वही पानी पीना होगा। भीड़ के सामने युवक ने यह सजा पूरी की। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया।

OBC समाज का प्रदर्शन

इस घटना के बाद ओबीसी वर्ग के संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि यह जातिगत अपमान है और प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा। मामला मीडिया में आते ही पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। इसी बीच दमोह के भाजपा नेता और मांझी समाज के युवा प्रदेश अध्यक्ष मोंटी रैकवार ने एक श्रद्धांजलि सभा में 51 ब्राह्मणों के पैर धोए और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “यह हमारी पुरानी परंपरा है, जिसमें पंडितों को पूजनीय माना जाता है।”

मोंटी का कहना है कि समाज को तोड़ने की कोशिश करने वालों को जवाब देने के लिए उन्होंने यह आयोजन किया। उनका कहना था कि उन्होंने बचपन से ही अपने बड़ों को ऐसा करते देखा है।

यूथ कांग्रेस का पलटवार

मोंटी रैकवार की इस पहल पर यूथ कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। संगठन ने कहा कि भाजपा और आरएसएस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मोंटी को सत्ताधारी नेताओं का संरक्षण प्राप्त है और वह पूरे घटनाक्रम को मोड़ने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस ने यहां तक कहा कि मोंटी का दमोह कलेक्टर और अन्य अफसरों से करीबी संबंध है।

जांच की मांग

दमोह का माहौल अभी भी गर्म है। ओबीसी संगठनों ने दोषियों पर एनएसए लगाने की मांग की है, जबकि राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह सख्त कार्रवाई करे, क्योंकि लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक गांव का मामला नहीं, बल्कि समाज और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।

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