मध्य प्रदेश के सतना जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मृतक का शव तीन घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा, क्योंकि 108 एम्बुलेंस सेवा का ड्राइवर फोन ही नहीं उठा रहा था। परिजनों ने बार-बार कॉल किया, लेकिन हर बार फोन कट गया। आखिर थककर परिवार खुद ड्राइवर के पास पहुंचा, तो पता चला कि ड्राइवर गहरी नींद में सो रहा था। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने ड्राइवर को नींद से उठाया और कहा कि शव को अस्पताल ले चलो, तो उसने बात करने से इनकार कर दिया और कहा कि अब नहीं जाऊंगा।
घटना गुरुवार की देर रात की बताई जा रही है। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि जैसे ही व्यक्ति की मौत हुई, उन्होंने तुरंत 108 नंबर पर कॉल किया। कॉल लग भी गई, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। लगातार तीन घंटे तक अलग-अलग मोबाइल से कॉल की गई, लेकिन हर बार या तो फोन बजता रहा या कट गया। अंत में परिजनों ने खुद जाकर एम्बुलेंस ड्राइवर को खोजा। जब वे वहां पहुंचे तो पाया कि वाहन खड़ा था और ड्राइवर अंदर सो रहा था।
ड्राइवर ने नहीं की मदद
परिवार ने बताया कि ड्राइवर को जब समझाने की कोशिश की गई, तो उसने उल्टा झगड़ना शुरू कर दिया। उसने कहा कि अब नहीं जाऊंगा, किसी और को बुलाओ। इस पर गुस्साए परिजनों ने पूछा कि अगर आप नहीं जाएंगे तो आम जनता किस पर भरोसा करे? लेकिन ड्राइवर पर कोई असर नहीं पड़ा। यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लोग पूछ रहे हैं कि जब इमरजेंसी सेवा का ड्राइवर ही सो जाएगा, तो फिर 108 सेवा का मतलब क्या रह गया? इस घटना ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम की हालत उजागर कर दी है, जहां जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दोनों गायब दिखती हैं।
अधिकारियों से जवाब मांग रहे लोग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर ड्राइवर लापरवाह है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए और एम्बुलेंस सेवा को जवाबदेह बनाया जाए। लोगों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं भरोसे को तोड़ती हैं और सवाल उठाती हैं कि आखिर आम आदमी संकट की घड़ी में किस पर भरोसा करे?
