मध्य प्रदेश में अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के बाद वकीलों में गहरा आक्रोश है। 14 फरवरी को शिवपुरी में हुई इस घटना ने प्रदेशभर के अधिवक्ताओं को झकझोर दिया। बताया जा रहा है कि वे यूनिफॉर्म में न्यायालय जा रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया। इस घटना के विरोध में सोमवार को प्रदेश के वकील न्यायालयीन कार्य से अलग रहे।
घटना के विरोध में Madhya Pradesh State Bar Council ने रविवार को हुई बैठक में सोमवार को ‘प्रतिवाद दिवस’ मनाने का फैसला लिया। इससे पहले Madhya Pradesh High Court Bar Association, जिला बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार ने भी संयुक्त रूप से पैरवी न करने का निर्णय लिया था। काउंसिल के चेयरमैन राधेलाल गुप्ता ने कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर अब निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
शिवपुरी में अधिवक्ता
बैठक में अधिवक्ताओं पर बढ़ते हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताया गया। वकीलों ने एक स्वर में एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट को शीघ्र लागू करने की मांग की। काउंसिल का कहना है कि जब तक कानून के माध्यम से सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा। इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तय की गई है।
7 दिन का अल्टीमेटम
बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया जाएगा। इस अवधि में कलेक्टर और तहसील स्तर पर अधिवक्ता, तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो काउंसिल के नेतृत्व में प्रदेशभर के करीब सवा लाख अधिवक्ता भोपाल जाकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। बैठक के अंत में दिवंगत अधिवक्ता को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
नौकरी की मांग
संयुक्त बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि संजय कुमार सक्सेना के परिवार को एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे विधि समुदाय की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है।
