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MP में शराब होगी महंगी, नई आबकारी नीति तैयार; कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार

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Published On: 17 January 2026

MP सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति तैयार कर ली है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी करना और शराब बिक्री की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना बताया जा रहा है। इस वर्ष सरकार ने शराब से होने वाले राजस्व का लक्ष्य 19,000 करोड़ रुपए रखा है। नीति में शराब की कीमतों में वृद्धि, दुकान नीलामी की दर बढ़ाना और नई दुकानें न खोलने जैसी प्रमुख बातें शामिल हैं।

आबकारी नीति के तहत शराब की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। शराब की दुकानों पर लगने वाले नए नियमों के अनुसार, शराब की दुकानों की नीलामी 20% अधिक कीमत पर होगी। इसका सीधा असर दुकानों पर और शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शराब पर सियासी और आर्थिक दोनों तरह का असर देखने को मिल सकता है।

MP में नहीं खुलेंगी नई दुकानें

सरकार ने साफ कर दिया है कि नई शराब की दुकानें खोली नहीं जाएंगी। इसका मतलब यह है कि मौजूदा दुकानों को ही नीलामी प्रक्रिया के तहत संचालित किया जाएगा। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और मौजूदा दुकानों की कीमत में इजाफा होगा। वहीं, शराब विक्रेताओं का कहना है कि इससे उनका परिचालन महंगा और चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

राजस्व बढ़ाने की रणनीति

आबकारी नीति का एक प्रमुख मकसद राज्य के खजाने में अधिक से अधिक राजस्व जुटाना है। 19,000 करोड़ रुपए का लक्ष्य सरकार ने इसलिए रखा है ताकि शराब से मिलने वाले लाभ का इस्तेमाल विकास कार्यों, सामाजिक योजनाओं और सरकारी परियोजनाओं में किया जा सके। नीलामी और कीमत बढ़ोतरी से सरकार को अनुमानित राजस्व लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।

कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार

नई आबकारी नीति अभी कैबिनेट से मंजूरी पाने वाली है। अनुमोदन के बाद ही इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा। नीति में पारदर्शिता, दुकानों की नीलामी प्रक्रिया और शराब बिक्री की मॉनिटरिंग को लेकर भी दिशा-निर्देश शामिल हैं। विशेषज्ञों और व्यापारियों की नजर इस पर रहेगी कि नीति लागू होने के बाद किस हद तक इसका असर दुकानदारों और उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

नीति में शराब महंगी होने की संभावना के चलते आम उपभोक्ता की जेब पर असर पड़ेगा। वहीं, अधिक नीलामी दर से शराब विक्रेताओं के परिचालन लागत में वृद्धि हो सकती है। सामाजिक दृष्टि से नीति का उद्देश्य शराब की बिक्री नियंत्रित करना और राज्य के राजस्व में वृद्धि करना है, लेकिन जनता पर इसका आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

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