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भोपाल की वोटर लिस्ट में बड़ा उलटफेर! लाखों नाम हटे, 1.16 लाख मतदाता रडार पर

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Published On: 23 December 2025

भोपाल में मतदाता सूची को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। साल 2003 की वोटर लिस्ट के आधार पर की गई जांच में शहर के 1 लाख 16 हजार मतदाताओं का रिकॉर्ड मेल नहीं खा पाया। ऐसे मतदाताओं को ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में रखा गया है और मंगलवार से इन्हें नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सोमवार से मतदाता सूची में दावे और आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जो अगले एक महीने तक चलेगी। इस दौरान नए नाम जोड़े जाएंगे, गलत प्रविष्टियां सुधारी जाएंगी और अपात्र पाए जाने वाले नाम हटाए जाएंगे। प्रशासन का मकसद मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन करना है।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद भोपाल जिले की वोटर लिस्ट से कुल 4 लाख 38 हजार नाम हटा दिए गए हैं। ये नाम मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से अन्य जगह शिफ्ट हो चुके लोगों, लंबे समय से अनुपस्थित मतदाताओं और डुप्लीकेट एंट्री के आधार पर हटाए गए।

मांगा जाएगा रिकॉर्ड

जिन मतदाताओं का 2003 की सूची से कोई प्रमाण नहीं मिला, उन्हें अगले 50 दिनों के भीतर अपना वैध रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा। यदि तय समय सीमा में दस्तावेज नहीं दिए गए, तो उनके नाम मतदाता सूची से स्थायी रूप से हटाए जा सकते हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता के अनुसार, 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अपने-अपने बूथ पर बैठकर फॉर्म 6, 7 और 8 स्वीकार करेंगे। इसी दौरान ‘नो मैपिंग’ वाले मतदाताओं को नोटिस सौंपे जाएंगे।

यहां सबसे ज्यादा कटौती

नरेला विधानसभा में 81 हजार 235 नाम हटाए गए हैं। यहां 6138 मतदाता मृत, 65 हजार से अधिक अन्य स्थानों पर शिफ्ट, 6098 अनुपस्थित और 528 नाम डुप्लीकेट पाए गए। वहीं गोविंदपुरा में 97 हजार 52 नाम कटे, जो सभी विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा हैं। बैरसिया विधानसभा में चारों श्रेणियों में सबसे कम मतदाता पाए गए। यहां कुल 12 हजार 903 नाम हटाए गए, जिनमें मृत, अनुपस्थित, शिफ्टेड और डुप्लीकेट मतदाता शामिल हैं।

अन्य विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति

हुजूर में शिफ्टिंग और अनुपस्थिति के मामले ज्यादा सामने आए, जबकि भोपाल मध्य में 67 हजार 304, भोपाल दक्षिण-पश्चिम में 63 हजार 433 और भोपाल उत्तर में 51 हजार 058 नाम चारों श्रेणियों में चिन्हित कर हटाए गए हैं। चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर प्रशासन पूरी सख्ती के मूड में है। साफ संदेश है—जो पात्र है, उसका नाम रहेगा और जो अपात्र है, वह सूची से बाहर होगा।

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