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भोपाल की वोटर लिस्ट से करीब 4.8 लाख नाम हटने की तैयारी, मौत की पुष्टि के बाद कार्रवाई तय

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Published On: 9 December 2025

भोपाल में मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। शहर की वोटर लिस्ट से 4 लाख 79 हजार 44 मतदाताओं के नाम हटने की संभावना है। चुनाव आयोग की टीम ने पाया कि इन मतदाताओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो अपने पते पर नहीं मिले, दूसरे शहरों में शिफ्ट हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। जिला प्रशासन ने बताया कि भोपाल में SIR प्रक्रिया के डिजिटलाइजेशन का काम अब पूरा कर लिया गया है। कुल 17,17,981 फॉर्म डिजिटल रूप से दर्ज किए गए। इस दौरान करीब 2.23 लाख मतदाता ऐसे पाए गए जिनका रिकॉर्ड 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खाता। ऐसे सभी वोटरों को ‘नो मैपिंग’ की श्रेणी में रखा गया है।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता के अनुसार, ‘नो-मैपिंग’ वाले प्रत्येक मतदाता को 50 दिन की सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए जिले में 100 सहायक रजिस्ट्रेशन अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जो विधानसभा-स्तर पर हर दावे और आपत्ति की सुनवाई करेंगे।

16 दिसंबर से शुरू होगी अंतिम जांच

मतदाता सूची का प्रकाशन 16 दिसंबर को होना है। इसके बाद, BLO घर-घर फॉर्म लेंगे। नए मतदाता भी नाम जोड़वा सकेंगे। जिनका रिकॉर्ड सत्यापित नहीं होगा, उनके नाम हटाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी। गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां 99,141 मतदाता चार अलग-अलग श्रेणियों में चिन्हित हुए हैं। इनमें सर्वाधिक 61,382 लोग शिफ्ट पाए गए। नरेला में 5,679 मतदाताओं की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जबकि 50 हजार से ज्यादा लोग अन्य स्थानों पर शिफ्ट मिले।

हुजूर और बैरसिया में भी बड़ी संख्या प्रभावित

हुजूर में 31,381 मतदाता गायब, 32,934 शिफ्ट, और 5,386 मृत पाए गए। वहीं बैरसिया में चारों श्रेणियों को मिलाकर आंकड़ा भी काफी बड़ा है। बता दें कि यहां लगभग 12,000 से ज्यादा मतदाता विभिन्न कारणों से सूची से हटने की कगार पर हैं। भोपाल मध्य में 60,098, दक्षिण-पश्चिम में 56,950 और उत्तर विधानसभा में 40,584 मतदाता चारों श्रेणियों में पाए गए हैं, जिन्हें सूची से हटाया जा सकता है।

प्रशासन की चुनौती

इतनी बड़ी संख्या में बदलाव के बीच जिला प्रशासन पर सही और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी है। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची को बिल्कुल साफ और सटीक बनाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि कोई वैध मतदाता वंचित न रह जाए और फर्जी या निष्क्रिय नाम सूची में न रहें।

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